अस्पताल के एमएस डॉ. केके टम्टा, दूसरे डॉक्टर, नर्स, सुरक्षाकर्मी और बड़ी संख्या में तीमारदार एकत्र हो गए। कई देर तक स्विच और बटन चेक करने के बावजूद लिफ्ट नहीं खुली तो ठेकेदार और इंजीनियरों को सूचना दी। तब तक अस्पताल कर्मचारियों ने बेसमेंट में पड़े लोहे की रॉड और पाइप की मदद से किसी तरह लिफ्ट के दरवाजे का कुछ हिस्सा खोला।
अंदर छह लोग दिखाई दिए। इनमें तीन युवक, एक बुजुर्ग और दो पुलिसकर्मी शामिल थे। मरीजों की बिगड़ती हालत को देखते हुए दरवाजे के खुले हिस्से से बमुश्किल पानी की बोतलें और यूरीन ब्लॉडर अंदर पहुंचाए गए। कुछ देर बाद मौके पर इंजीनियर पहुंचे और लिफ्ट खोली। बताया गया कि मरीजों में से किसी ने माइनस का बटन दबा दिया था, जिससे लिफ्ट सीधे बेसमेंट में चली गई। बेसमेंट में निर्माण कार्य अभी पूरा न होने से यह स्थिति बनी है।
दून मेडिकल कॉलेज और अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरी के पीजी कोर्स के लिए वार्डों की संख्या बढ़ाने के लिए एमसीआई के निर्देश पर ओपीडी को पुरानी बिल्डिंग से नई बिल्डिंग में शिफ्ट तो कर दिया है, लेकिन आधी अधूरी तैयारी के साथ। पुरानी बिल्डिंग में सिर्फ गायनी (महिला एवं प्रसूति रोग) विभाग की ओपीडी रखी है।
अभी नई बिल्डिंग में जगह-जगह निर्माण सामग्री फैली हुई है। पांच मंजिला भवन के विभिन्न फ्लोर पर मरीजों के आने जाने के लिए बनने वाली लिफ्ट का काम भी अधर में है। दो छोटी लिफ्टों में छह से अधिक लोग नहीं आ सकते। ये लिफ्ट अक्सर खराब रहती है। जिससे मरीजों को खासकर बुजुर्गों, सांस और हड्डी के मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
मरीजों के लिफ्ट में फंसे होने का पता लगते ही अस्पतालकर्मियों ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया। मुश्किल से लिफ्ट का कुछ खोलकर अंदर पानी पहुंचाया। साथ ही ठेकेदार व इंजीनियरों को बुलाकर लिफ्ट को खुलवाया गया। फिलहाल दोनों लिफ्ट का संचालन रोककर खराब होने की वजह जांचकर दुरुस्त कराया जा रहा है।
- डॉ. केके टम्टा, चिकित्सा अधीक्षक दून अस्पताल
चिकित्सा अधीक्षक से मुझे इस बारे में जानकारी मिली थी। तकनीकी खामी के चलते ऐसी स्थिति होनी बताई गई है। लिफ्ट के ठेकेदार को अवगत कर व्यवस्था सुचारु करने को कहा है। मरीजों वाली लिफ्ट लगाने का कार्य तेजी से किया जाएगा।
-डॉ. आशुतोष सयाना, प्रिंसिपल दून मेडिकल कॉलेज