मानसिक रूप से हो बीमार या फिर हो अपराधी सभी को लाते हैं यहां
ज्योति पटवाल ने बताया कि कोई महिला मानसिक रूप से बीमार हो या फिर किसी अपराध में आरोपी हो सभी को इस केंद्र में डाल दिया जाता है। उसमें भी इन महिलाओं को अलग-अलग नहीं रखा जाता। इससे आए दिन ये महिलाएं आपस में झगड़ती रहती हैं और एक-दूसरे को चोट पहुंचाती रहती हैं।
ये है व्यवस्था
- इस तरह की बालिकाओं और महिलाओं को रखा जाता है यहां
- पहले सेल में मानसिक रूप से बीमार महिलाओं को रखा जाता है। यहां हर उम्र की महिलाएं रहती हैं।
- दूसरे सेल में ऐसी लड़कियों को रखा जाता है जो घर से भाग जाती हैं और 18 साल से कम उम्र की हैं।
- तीसरे सेल में ऐसी लड़कियां रहती हैं जो किसी अपराध में आरोपी हैं और 18 साल से कम उम्र की हैं।