एस्मा लगने के बावजूद राजधानी देहरादून में नर्सें हड़ताल पर अड़ी हैं। हड़ताल से आम मरीज हलकान हैं। सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को हो रही है।
तीन दिन के सामूहिक कार्य बहिष्कार के बाद राजकीय नर्सेज एसोसिएशन ने गुरुवार से हड़ताल शुरू कर दी है। ठीक से देखभाल न होने पर मरीज सरकारी अस्पतालों से मुंह मोड़ रहे हैं। जिले के सबसे बड़े सरकारी दून अस्पताल के सर्जिकल वार्ड, बच्चा वार्ड और डायलिसिस कक्ष में ताला लगा पड़ा है।
वहीं, जिला महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाएं अधिक पीड़ा सहने को मजबूर हैं। महिला अस्पताल में गर्भवतियों के सीजेरियन (ऑपरेशन) नहीं किए जा रहे हैं। समर्पण एनजीओ की नर्सों और फार्मासिस्ट के सहारे वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।
लेकिन ट्रेंड स्टाफ की कमी से महज सामान्य डिलीवरी ही हो रही हैं। गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा बहुत ज्यादा बढ़ने पर ही सरकार की ओर से मिलने वाले निशुल्क इलाज के लिए पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।
प्रशिक्षण ले रही नर्सिंग छात्राएं भी ड्यूटी देने को तैयार नहीं
स्वास्थ्य विभाग राजकीय नर्सिंग कॉलेज और कुछ निजी मेडिकल कॉलेजों से भी दोनों बड़े सरकारी अस्पतालों (दून और जिला महिला अस्पताल) में नर्स की ड्यूटी लगाने की व्यवस्था की कोशिश कर रहा है।
लेकिन नर्सिंग कॉलेज में प्रशिक्षण ले रही नर्सिंग छात्राएं भी ड्यूटी देने को तैयार नहीं हैं। यही वजह है कि दून अस्पताल से दो दिन से नर्सिंग छात्राओं को लेने चंदरनगर स्थित कॉलेज जा रही बस खाली लौट जाती है।