टीम ने प्रारंभिक जांच में पाया कि त्रिफला हर्बल केंद्र के संचालक स्वयं को एक पंजीकृत डॉक्टर के रूप में अवैध रूप से आयुर्वेद दवाइयों का कारोबार कर रहे थे। जबकि उनके पास आयुष पद्धति (आयुर्वेद, यूनानी या होम्योपैथी) में कोई डिग्री नहीं है।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) व आयुर्वेद विभाग की संयुक्त टीम ने सहस्त्रधारा रोड स्थित त्रिफला हर्बल सेंटर पर छापा मारकर अवैध रूप से आयुर्वेद दवाइयों के कारोबार का पर्दाफाश किया है। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि केंद्र संचालन के पास न तो आयुर्वेद, होम्योपैथी चिकित्सा की कोई डिग्री है और न ही लाइसेंस है।
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आयुष मंत्रालय को मिली शिकायत के आधार पर सीडीएससीओ व आयुर्वेद विभाग की टीम ने त्रिफला हर्बल सेंटर पर छापा मारा। कार्रवाई में टीम ने भारी मात्रा आयुर्वेद दवाइयों के साथ ही नकदी जब्त की है। सीडीएससीओ के उप ड्रग कंट्रोलर देवाशीष पांडा व राज्य आयुर्वेद ड्रग कंट्रोलर केएस नपलच्याल की अगुवाई में टीम ने प्रारंभिक जांच में पाया कि त्रिफला हर्बल केंद्र के संचालक स्वयं को एक पंजीकृत डॉक्टर के रूप में अवैध रूप से आयुर्वेद दवाइयों का कारोबार कर रहे थे।
जबकि उनके पास आयुष पद्धति (आयुर्वेद, यूनानी या होम्योपैथी) में कोई डिग्री नहीं है। वह एक्यूप्रेशर के लेटर हेड का उपयोग कर मधुमेह व उच्च रक्तचाप जैसे गंभीर रोगियों को चिकित्सा परामर्श देने के साथ देश के विभिन्न हिस्सों में दवाइयां भेज रहे थे।
क्लीनिक की ऊपरी मंजिल में बिना किसी वैध लाइसेंस के आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथिक दवाओं का निर्माण और पैकिंग की जा रही थी। मौके से भारी मात्रा में खुली व पैकिंग दवाईयां, लेबल, रजिस्टर, बिल बुक और औषधि निर्माण में प्रयोग होने वाली मशीनें जब्त की गई। क्लीनिक से नकदी भी मिली है। इस संबंध में विभाग ने आयकर विभाग को सूचित किया। सीडीएससीओ की टीम ने जांच के लिए कई दवाओं के सैंपल भी भरे हैं। आशंका जताई जा रही थी कि आयुर्वेद दवाइयों में मिलावट हो सकती है। विभागीय अधिकारियों ने कहा, बिना लाइसेंस और बिना योग्यता के इस तरह का चिकित्सा अभ्यास लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।