सुरेश जाटव उर्फ मिश्रा के पास से पुलिस ने चार चूड़ियां, एक चेन, लड़ीदार चेन, सफेद नग जड़ी एक ब्रेसलेट, मोती जड़ी ब्रेसलेट, पीली नगर जड़ी टॉप, टॉप, घंटीनुमा टॉप, कान के पांच टॉप्स, ब्रेसलेट, सफेद नग वाली चेन और एक अन्य नग बरामद हुआ।
हरिद्वार में लूटा था ट्रक
सुरेश जाटव एक शातिर किस्म का अपराधी है। उसके खिलाफ पहले से 30 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें ज्यादातर डकैती और लूट के शामिल हैं। बीते वर्षों में उसकी पुलिस से मुठभेड़ भी हो चुकी है। आरोपी वर्ष 2013 में हरिद्वार तारों से भरे ट्रक लूट मामले में भी शामिल रहा है। यही नहीं वर्ष 2008 में मयूर विहार फेस वन दिल्ली में डकैती के दौरान हत्याकांड में भी आरोपी मुख्य रूप से शामिल रहा है।
बिल्डर के घर करनी थी डकैती, नहीं मिला मौका
आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसकी फईम के साथ दोस्ती 2008 में दिल्ली तिहाड़ जेल में हुई थी। इसके बाद गाजियाबाद निवासी फकरू के संपर्क में आए। सितंबर 2019 में फईम ने उसे घटना के पहले अदनान और वीरेंद्र ठाकुर से मिलवाया था। उन्हें पहले देहरादून में एक बिल्डर के घर डकैती करनी थी, लेकिन बहुत प्रयास करने पर भी वे सफल नहीं हो पाए। ऐसे में ठाकुर के बताए दूसरे निशाने ईश्वरन के घर पर धावा बोल दिया।
सुरेश जाटव उर्फ मिश्रा की मेरठ पुलिस ने हिस्ट्रीशीट खोली हुई है। वह कई साल से मेरठ पुलिस से छुपा हुआ था। कई कई महीनों तक उसके घरवालों को भी नहीं पता रहता था कि सुरेश कहां जा रहा है और क्या कर रहा है? इस वक्त वह अपनी ससुराल के घर में बनाए एक बंकर में छुपा हुआ था।
मेरठ पुलिस कई प्रयासों के बावजूद सुरेश को नहीं ढूंढ पाई, लेकिन दून एसओजी ने इसे जैसे अपना लक्ष्य ही बना लिया था। बीते छह माह से ज्यादा समय से एसओजी के कई कर्मचारियों को सिर्फ मिश्रा यानी सुरेश जाटव के बारे में ही पता करने क जिम्मेदारी दी गई थी।
जांच में पता चला कि वह मेरठ में अपनी ससुराल के घर के नीचे बंकर बनाकर रह रहा है। वहां से उसकी लोकेशन आदि का भी कुछ पता नहीं चल पाता था। आखिर में एसओजी की टीम खुफिया बंकर तक पहुंच गई। सुरेश इसे तहखाना कहता है। गिरफ्तारी वाली टीम में इंस्पेक्टर एश्वर्यपाल के साथ कांस्टेबल ललित, देवेंद्र, अमित, पंकज चौधरी और आशीष शामिल रहे।
एसओजी की टीम को पुरस्कृत किया जाएगा। टीम ने बहुत मेहनत करने के बाद इसे शातिर बदमाश को पकड़ा है। पुलिस अब तक इस मामले में अधिकतर लूटी गई चीजों को बरामद कर चुकी है। बाकी के लिए बदमाशों को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया जाएगा।
-अरुण मोहन जोशी, डीआईजी, देहरादून