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Dehradun news : ऑफलाइन में कैसे चलेगा स्मार्ट राशन कार्ड, विक्रेता एसोसिएशनों ने भी खड़े किए सवाल

Tue, 05 Jan 2021 01:16 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal गौरव ममगाईं, अमर उजाला, देहरादून
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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देहरादून जिले में अब स्मार्ट राशन कार्ड लागू करने की तैयारी है, लेकिन सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को ऑनलाइन नहीं किया जा सका है। शहर की बड़ी संख्या में सरकारी राशन की दुकानों में रजिस्टर के माध्यम से ऑफलाइन ही राशन वितरण हो रहा है। वहीं कई विक्रेता ऑनलाइन पीडीएस में रुचि नहीं ले रहे हैं। ऐसे में स्मार्ट राशन कार्ड लागू करने की योजना पर राशन विक्रेता एसोसिएशनों ने सवाल खड़े किए हैं। 

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 खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से पीडीएस को ऑनलाइन करने के तहत दो साल पहले सरकारी राशन विक्रेताओं को लैपटॉप, बायोमीट्रिक मशीन व प्रिंटर दिए गए थे, ताकि राशन विक्रेता राशन कार्डधारकों को बायोमीट्रिक के माध्यम से राशन वितरण करें। साथ ही वितरित राशन की ऑनलाइन एंट्री करें, ताकि राशन वितरण में पादर्शिता बनी रहे।

हालांकि, कोरोनाकाल में बायोमीट्रिक पर कुछ समय से रोक है। वहीं शुरू से ही राशन विक्रेता ऑनलाइन पीडीएस व्यवस्था से कन्नी काटते रहे हैं। खुड़बुड़ा, रायपुर, क्लेमेंटटाउन, धर्मपुर समेत अनेक इलाकों की कई दुकानें ऑनलाइन नहीं जुड़ पाई हैं। राशन विक्रेता एसोसिएशनों ने भी विक्रेताओं के इस रवैये पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, अन्य दुकानों में ऑनलाइन पीडीएस में अच्छा काम भी कर रही हैं। 
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इंटरनेट व ट्रेनिंग न होने का दे रहे हवाला

ऑफलाइन काम कर रहे राशन विक्रेता कई तरह के अलग-अलग तर्क दे रहे हैं। किसी का कहना है कि दुकान में इंटरनेट में कनेक्टिविटी की समस्या रहती है तो किसी का कहना है कि उन्हें कंप्यूटर चलाना नहीं आता। 

कई राशन विक्रेता ऑनलाइन पीडीएस को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इनकी उदासीनता के कारण व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। ऐसे विक्रेताओं के खिलाफ विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए।
- हेमंत अग्रवाल, जिला महासचिव, उत्तराखंड उचित दर राशन विक्रेता एसोसिएशन

इस योजना में विभाग ने करोड़ों रुपये खर्च किए हैं। यह महत्वाकांक्षी योजना है। कुछ राशन विक्रेताओं पर विभाग की सख्ती का भी असर नहीं पड़ रहा है। इस पर सवाल भी खड़े होना स्वाभाविक है।
- जितेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष, सरकारी सस्ता गल्ल विक्रेता परिषद

राशन की दुकानों में पीडीएस को ऑनलाइन करने का काम लगातार जारी है। करीब 70 प्रतिशत दुकानें ऑनलाइन जुड़ चुकी हैं। कई दुकानों के विक्रेताओं को ट्रेनिंग देना बाकी है। इन्हें भी सीएससी से ट्रेनिंग देकर जल्द ऑनलाइन किया जाएगा।
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-जसवंत सिंह कंडारी, डीएसओ

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