अपहरणकर्ताओं ने पूछताछ में बताया कि वह बच्चे को ज्यादा देर तक संभाल नहीं पा रहे थे। वह बहुत रो रहा था। इसके बाद उन्होंने वापस आने की योजना बना ली। लेकिन, फिर सोचा कि यदि बच्चे को छोड़ा जाएगा तो बच्चा उन्हें पहचान लेगा। इस कारण उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद शव को एक बोरे में रखा और उसे पत्थरों से भरकर नहर में फेंक दिया। नहर में पानी कम था। ऐसे में यह बोरा ज्यादा दूर नहीं जा सका। यदि पानी अधिक होता तो पुलिस को शव बरामद करने में भी परेशानी होती।
जनवरी में बनी थी योजना, फोन करने के लिए छीना था मोबाइल
आरोपियों के ऊपर कर्ज बताया जा रहा है। ऐसे में उन्होंने बच्चे के अपहरण की योजना जनवरी में ही बना ली थी। उन्हें इतना पता था कि यदि अपना मोबाइल इस्तेमाल किया तो फंस जाएंगे। लिहाजा, उन्होंने जनवरी अंत में एक व्यक्ति का मोबाइल छीना था। इसी मोबाइल से फिरौती के लिए परिवार को फोन किया गया था। यही नंबर उसने अपने करीबियों को दिया था।
पहले ही हो गया था पिता को शक
बच्चे के पिता को पहले से ही अनीस पर शक था। फिरौती के लिए दो बार फोन किया गया था। इसके बाद जब पुलिस ने पूछताछ की तो बच्चे के पिता ने अनीस पर ही शक जताया था। इसी के बाद पुलिस की जांच आगे बढ़ी और आरोपियों को पकड़ा जा सका। टीम में एसपी स्वतंत्र कुमार, एसपी ट्रैफिक स्वप्न किशोर सिंह, सीओ बीडी उनियाल, इंस्पेक्टर एसओजी एश्वर्य पाल, एसएचओ विकासनगर राजीव रौथाण, एसओ सहसपुर नरेंद्र गहलावत, एसओ कालसी गिरीश नेगी आदि शामिल रहे।