लच्छीवाला टोल प्लाजा पर होने वाली वसूली पर सिटी बस संचालक विरोध में उतर आए हैं। सोमवार से देहरादून से डोईवाला रूट पर चलने वाली सिटी बसों के मालिकों ने हड़ताल का ऐलान किया है। वह विरोध स्वरूप अपनी बसें लच्छीवाला टोल प्लाजा पर खड़ी कर प्रदर्शन कर रहे हैं।
डोईवाला-जौलीग्रांट रूट की सिटी बस चालकों ने सोमवार से टोल प्लाजा पर अपने वाहनों को श्रृंखलाबद्ध खड़ा कर हड़ताल शुरू कर दी है। चालकों का कहना है कि सिटी बस आम जनता के लिए सेवाएं देती है। उसे राहत देनी चाहिए और शुल्क बेहद कम लेना चाहिए। मौके पर काफी संख्या में जीप और अन्य वाहन चालक भी पहुंच गए हैं। व्यवस्था बनाने के लिए कोतवाल सूर्य भूषण नेगी पुलिस बल के साथ मौजूद हैं।
देहरादून से डोईवाला और जौलीग्रांट तक करीब 50 सिटी बसें चलती हैं। इनका कहना है कि एक बार में उनसे 135 रुपये वसूले जा रहे हैं। दिनभर में 500 से 600 रुपये केवल टोल प्लाजा पर ही चले जाते हैं। पहले से ही कोरोना से जूझ रहे सिटी बस संचालकों की यूनियन के अध्यक्ष रघुवीर सिंह नेगी ने कहा कि इस नुकसान की भरपाई नहीं हो पा रही है।
लिहाजा, तय किया गया है कि सोमवार से देहरादून से डोईवाला-जौलीग्रांट रूट पर कोई सिटी बस नहीं चलेगी। दूसरी ओर, मैक्सी कैब एसोसिएशन भी टोल प्लाजा पर वसूली के विरोध में उतर आई है।
दूधली मोथरोवाला में बढ़ी ग्रामीणों की दिक्कतें
लच्छीवाला टोल प्लाजा से वाहनों की आवाजाही के लिए शुल्क शुरू होने से बाईपास मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ने से ग्रामीणों की परेशानियां का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय वाहनों के अलावा दूसरे क्षेत्रों से आने वाले निजी और व्यावसायिक वाहन भी बाईपास मार्ग का इस्तेमाल करने लगे हैं।
देहरादून हरिद्वार हाईवे पर लच्छीवाला टोल प्लाजा बनाकर 18 फरवरी से शुल्क वसूलना शुरू हो गया है। ऐसे में शुल्क बचाने के लिए कई वाहन चालक रोजाना बाईपास मार्गों से आवाजाही कर रहे हैं। इन बाईपास मार्गों पर रहने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकतर लोग दूधली मोथरोवाला बाईपास से दून पहुंच रहे हैं।
इस बाईपास मार्ग पर सतीवाला, माधोवाला, झंडौद, सिमलास ग्रांट, नांगल ज्वालापुर, नांगल बुंलदावाला, दूधली समेत कई ग्रामीण इलाके पड़ते हैं। कई जगहों पर सड़क अपेक्षाकृत संकरी दुर्घटना की संभावनाएं हैं। सिमलास ग्रांट के पूर्व प्रधान उम्मेद वोरा ने बताया कि लच्छीवाला टोल शुरू होने से स्कूली बच्चों से लेकर किसानों को परेशानियां हो रही है। वहीं, दूसरी ओर वन पंचायत सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष करन बोरा ने कहा कि ग्रामीणों की मांगों का संज्ञान लिया जा रहा है।