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सदियों पुरानी परंपरा बहाल: खत पशगांव के लोग छह साल बाद बिस्सू जातर के साथ जाएंगे हनोल, 14 मई को होगी आयोजित

Mon, 11 May 2026 11:08 PM IST
Alka Tyagi संवाद न्यूज एजेंसी, साहिया(देहरादून)

सार

खत वासी 14 मई की सुबह हनोल मंदिर के लिए रवाना होंगे और 15 मई की शाम को वापस लौटेंगे। इस जातर के लिए खत में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।
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हनोल मंदिर - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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खत पशगांव के लोग करीब छह साल बाद हनोल मंदिर में बिस्सू जातर लेकर जाएंगे। यह सदियों पुरानी परंपरा है जो छत्रधारी चालदा महासू देवता के खत दसऊ पशगांव में विराजमान होने के कारण बाधित हो गई थी। अब देवता के हिमाचल प्रदेश के पश्मी में चले जाने के बाद यह जातर 14 मई को निकाली जाएगी।

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खत वासी 14 मई की सुबह हनोल मंदिर के लिए रवाना होंगे और 15 मई की शाम को वापस लौटेंगे। इस जातर के लिए खत में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, खत पशगांव के लोग प्रत्येक तीन साल बाद बिस्सू जातर लेकर हनोल जाते हैं। पिछले छह साल से यह जातर नहीं हो पाई थी क्योंकि छत्रधारी चालदा महासू देवता खत दसऊ पशगांव में विराजमान थे। अब देवता दसऊ से हिमाचल प्रदेश के पश्मी में चले गए हैं, जिसके चलते यह जातर संभव हो पाई है।

मान्यता है कि इन दो दिनों में देवता को चढ़ाई जाने वाली भेंट का आधा हिस्सा खत दसऊ पशगांव का होता है। इन दो दिनों की राजशाही भी खत की ही रहती है और मंदिर समिति का भेंट पर कोई अधिकार नहीं रहता।
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परंपरा और अधिकार
खत स्याणा शूरवीर सिंह चौहान, पदम सिंह चौहान, युद्धवीर सिंह चौहान, मातबर सिंह तोमर और रघुवीर नौटियाल ने बताया कि जेठी खत होने के कारण खतवासी हर तीन साल बाद बिस्सू जातर हनोल मंदिर लेकर जाते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। उन्होंने यह भी बताया कि खत के जाते ही मंदिर समिति से पूरा अधिकार हटकर पशगांव खत के ऊपर आ जाता है। भेंट का आधा अधिकार खत का रहता है।

जातर में शामिल गांव
खत स्याणा ने जानकारी दी। खत के दसऊ, हाजा, डाडुवा, कितरोली, गबेला, दौधा, सुनोडा, मठियाना, भूपोऊ, गंभरी, कोठा क्वानु, मझगांव, मैलोथ, दुनुवा और मलेथा जैसे गांव आते हैं। इन सभी गांवों की खत को जेठी खत कहा जाता है।
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