परंपरा और अधिकार
खत स्याणा शूरवीर सिंह चौहान, पदम सिंह चौहान, युद्धवीर सिंह चौहान, मातबर सिंह तोमर और रघुवीर नौटियाल ने बताया कि जेठी खत होने के कारण खतवासी हर तीन साल बाद बिस्सू जातर हनोल मंदिर लेकर जाते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। उन्होंने यह भी बताया कि खत के जाते ही मंदिर समिति से पूरा अधिकार हटकर पशगांव खत के ऊपर आ जाता है। भेंट का आधा अधिकार खत का रहता है।
जातर में शामिल गांव
खत स्याणा ने जानकारी दी। खत के दसऊ, हाजा, डाडुवा, कितरोली, गबेला, दौधा, सुनोडा, मठियाना, भूपोऊ, गंभरी, कोठा क्वानु, मझगांव, मैलोथ, दुनुवा और मलेथा जैसे गांव आते हैं। इन सभी गांवों की खत को जेठी खत कहा जाता है।