अक्तूबर 2015 में अमर उजाला ने नारी निकेतन में मूक बधिर संवासिनी के साथ अनहोनी की घटना का खुलासा किया था। सूचना पुख्ता थी इसके आधार पर पुलिस भी हरकत में आई और नेहरू कॉलोनी थाने में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। इसके बाद 24 नवंबर 2015 को मुख्यमंत्री के आदेश पर तत्कालीन एसपी सिटी अजय सिंह के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन किया गया।
एसआईटी की जांच में एक-एक कर सभी परतें खुलती चली गईं और संवासिनी पर जुल्म ढाने वाले दरिंदे सलाखों के पीछे जाते रहे। इस मामले में पुलिस ने नारी निकेतन की तत्कालीन अधीक्षिका मीनाक्षी पोखरियाल, कर्मचारी अनिता मंदोला, क्राफ्ट टीचर शमा निगार, किरण नौटियाल, टीचर चंद्रकला क्षेत्री, संविदाकर्मी कृष्णकांत शाह उर्फ कांछा, होमगार्ड ललित बिष्ट, केयर टेकर हाशिम और मुख्य आरोपी सफाई कर्मचारी गुरदास को गिरफ्तार किया था।
गुरदास पर आरोप था कि उसने संवासिनी से दुष्कर्म किया, जिसके बाद वह गर्भवती हो गई थी। जबकि, होमगार्ड ललित बिष्ट और केयर टेकर हाशिम ने भी संवासिनी से दुष्कर्म का प्रयास किया था। इस बात का कहीं पता न चले इसके लिए बाकी सभी ने आपराधिक षडयंत्र रचते हुए संवासिनी का गर्भपात कराया और भ्रूण को जंगल में दबा दिया। एसआईटी ने दुधली के जंगल से भ्रूण भी बरामद कर लिया था।
इसका डीएनए मिलान गुरदास के साथ हुआ, जिससे केस को और मजबूती मिल गई। शासकीय अधिवक्ता संजीव सिसौदिया ने बताया कि अभियोजन की ओर से इस मुकदमे में कुल 23 गवाह पेश किए गए। जबकि, न्यायालय ने डीएनए रिपोर्ट को महत्वपूर्ण तथ्य माना और सभी पहलुओं पर गौर करते हुए सभी नौ आरोपियों को दोषी करार दे दिया। सिसौदिया ने बताया कि सजा पर सोमवार को बहस होगी। सभी दोषियों को न्यायालय परिसर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
नारी निकेतन में दुष्कर्म और गर्भपात का शिकार मूक बधिर संवासिनी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई में ‘अमर उजाला’ अग्रणी रहा। संवासिनी पर हुए अत्याचार के संबंध में गोपनीय पत्र मिलने के बाद ‘अमर उजाला’ ने अक्तूबर 2015 में इस मामले का खुलासा किया था।
शुरुआत में मामले को दबाने की भरसक कोशिश हुई, लेकिन सूचनाएं पुख्ता हुईं तो फजीहत से बचने को सरकार को मामले की जांच के लिए 24 नवंबर 2015 को एसआईटी गठित करनी पड़ी। तत्कालीन एसएसपी सदानंद दाते और एसपी सिटी अजय सिंह के नेतृत्व में जांच हुई तो एक-एक कर आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच गए।