देहरादून में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से लाइसेंस फीस पर निगम प्रशासन बैकफुट पर आ गया है, अब यह लागू नहीं होगा। सोमवार को प्रदर्शन करने पहुंचे व्यापारियों से मुलाकात के बाद मेयर सुनील उनियाल गामा ने लाइसेंस फीस का प्रस्ताव स्थगित कर दिया है। इस पर व्यापारियों ने उनके निर्णय का स्वागत किया और बधाई दी।
लाइसेंस फीस को लेकर कई दिन से हो रहे व्यापारियों के विरोध को देखते हुए निगम ने लाइसेंस फीस लागू करने का प्रस्ताव फिलहाल टाल दिया है। व्यापारियों के तीन फरवरी को देहरादून बाजार बंद के एलान के बाद मेयर ने लाइसेंस शुल्क निरस्त करने के आदेश दिए। उन्होंने व्यापारियों को आश्वासन दिया कि जब भी लाइसेंस शुल्क पर विचार होगा, व्यापारियों से रायशुमारी की जाएगी।
निगम प्रशासन ने अपनी सीमा में होने वाले व्यवसाय पर सालाना व्यवसायिक शुल्क लगाने की कवायद में लाइसेंस फीस लागू करने का निर्णय लिया था। इसके तहत हाउस टैक्स के अलावा अस्पताल, होटल-रेस्टोरेंट, शराब की दुकानों, बैंक्वेट हॉल, ट्रासंपोर्टर, कोचिंग सेंटर, निजी स्कूल समेत 111 व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर 500 से एक लाख सालाना लाइसेंस फीस लेने की योजना बनाई थी। वर्ष 1999 में 30 श्रेणी में लाइसेंस शुल्क लागू थे, जिसे अब 111 श्रेणी कर दी गई थी। निगम की ओर से 19 जनवरी को प्रस्तावित शुल्क सार्वजनिक कर इस पर आपत्तियां मांगी थीं। उसके बाद से व्यापारी सड़क पर आंदोलन कर रहे थे।
सोमवार को दर्जनों व्यापारी संगठन एकजुट होकर निगम कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कहा कि केंद्र सरकार ने जब जीएसटी लागू किया था, उस समय कहा गया था कि सभी प्रकार के टैक्स इसमें शामिल हैं। लेकिन, अब लाइसेंस फीस लागू की जा रही है। जब वकीलों से लाइसेंस शुल्क वापस ले लिया गया तो व्यापारियों को भी इससे मुक्त रखा जाए। इस बीच मेयर सुनील उनियाल गामा निगम पहुंचे। उन्होंने लाइसेंस फीस की दरों को अव्यवहारिक मानते हुए इसे स्थगित कर दिया।