उत्तराखंड शासन ने देहरादून का जो संशोधित मास्टर प्लान जारी किया है, वह अवैध है।
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दरअसल, शासन ने प्लान जारी करने से पहले केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से इसकी स्वीकृति नहीं ली। संशोधित मास्टर प्लान की केवल ड्राफ्ट प्रति केंद्रीय मंत्रालय को भेजकर इतिश्री कर ली।
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अब तक मंत्रालय से इसे मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में मास्टर प्लान को जमीन पर लागू करना मुश्किल होगा। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट मानीटरिंग कमेटी मामले पर हाईकोर्ट में शिकायत करने की तैयारी में है।
लागू है दून वैली नोटिफिकेशन एक्ट
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने वर्ष 1989 में देहरादून को ईको सेंसिटिव जोन घोषित किया था। तब मंत्रालय ने दून वैली नोटिफिकेशन एक्ट जारी किया था।
इसके तहत दून में कोई गतिविधि शुरू करने या भू उपयोग परिवर्तन करने से पहले उसका मास्टर प्लान बनाकर मंत्रालय से स्वीकृति लेना अनिवार्य किया था। इस बार ऐसा नहीं किया गया।
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ऐसे में सवाल यह है कि 1989 के मुकाबले अब स्थितियां क्या बेहतर हो गई हैं? या तब से आबादी और निर्माण घट गए हैं? ऐसा नहीं हुआ है तो फिर मंजूरी क्यों नहीं ली गई?
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की स्वीकृति के बिना किसी प्रकार का भू-उपयोग बदलना गलत है। अगर ऐसा किया गया है तो इसे हाईकोर्ट के संज्ञान में लाया जाएगा।
- एमसी घिल्ड़ियाल, सचिव, सुप्रीम कोर्ट मानीटरिंग कमेटी
संशोधित मास्टर प्लान का ड्राफ्ट केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा गया था। यह ड्राफ्ट शासन ने या एमडीडीए ने भेजा था, इसकी जानकारी नहीं है। अभी इसे स्वीकृति नहीं मिली है।
- एस पंत, मुख्य नगर नियोजक, नगर एवं ग्राम्य विकास विभाग