उदघाटन के बाद आयोजित खुली किताब सत्र में पद्मभूषण रस्किन बांड ने स्कूली बच्चों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ साहित्य और लेखन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए बल्कि बच्चों के सवालों के जवाब भी दिए।
एक छात्रा ने रस्किन बांड से उनकी एक कविता पढ़ने के लिए कहा। रस्किन ने अपनी एक कविता पढ़कर सुनाई। वहीं एक और छात्रा मेधा ने पूछा की आपने लिखने के लिए मसूरी को ही क्यों चुना? इस पर रस्किन ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि मैं यहीं पला हूं। यहीं पढ़ाई भी की है। विदेशों में भी गया लेकिन मुझे प्रकृति और शांति की अच्छी लगती है। कविताएं और किताब लिखने के लिए शांति और खूबसूरत वादियां बेहद जरूरी हैं। इसलिए मैं यहां आया तो यहीं रह गया।
दून इंटरनेशनल स्कूल रिवरसाइड कैंपस की लीसा अग्राल, दून इंटरनेशनल स्कूल सिटी कैंपस के चाणक्य नायडू, वेल्हम बॉयज स्कूल के श्रेयांश जिंदल, वेल्हम गर्ल्स स्कूल की तारा गोविल, एमकेपी इंटर कॉलेज की मदीहा नाज़ और द दून स्कूल के आर्यन भट्टाचार्जी के पैनल ने रस्किन बॉन्ड सवाल किए। इसके बाद ओपन सत्र में भी स्कूली बच्चों ने उनसे सवाल पूछे।
समय - सत्र - वेन्यू - वक्ता/अतिथि
दोपहर 3.30 से 4 बजे - उद्घाटन - मेन ऑडी - पद्मभूषण रस्किन बांड व कर्नल राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ (सेनि)
4 से 4.45 बजे - खुली किताब - मेन ऑडी - रस्किन बांड और स्कूली बच्चों का संवाद
(इसी सत्र में अशानी तनेजा की किताब बैड ब्लड फ्रेनेमीस का विमोचन भी होगा)
4.45 से 5.30 बजे - फॉर द लव ऑफ रीडिंग - मेन ऑडी - रस्किन बांड का सभी स्कूल हेड से संवाद
5.30 से 6.30 बजे - कीपर्स ऑफ द कालचक्र - मेन ऑडी - अश्विन सांघी
(इसी सत्र में धैर्य अरोड़ा की पुस्तक एवरीवन हेज ए मिथ टू टैल का विमोचन भी होगा)
6.30 से 7 बजे - द ताशकंद फाइल्स - कोलेजियम - विवेक रंजन अग्निहोत्री, सुनील शास्त्री
7.30 से 8 बजे - द डेविल्स एडवोकेट (रिविलिंग द ट्रूूथ) - कोलेजियम - करन थापर