सरकार ने बीते एक माह में छह कैबिनेट बैठकें कर इन्वेस्टर्स समिट के लिए बड़े फैसले लिए। मंत्रिमंडल ने दो नई नीतियों के साथ आठ पुरानी नीतियों में संशोधन कर उन्हें इन्वेस्टर फ्रेंडली बनाया। सरकार ने 12 सेक्टरों के लिए निवेश आकर्षित करने की संशोधित और नई नीतियां प्रभावी कर दी हैं।
- इलेक्ट्रिक व्हीकल उत्पादन नीति
- एरोमा पार्क पालिसी
- उत्तराखंड आयुष नीति
- उत्तराखंड सौर ऊर्जा नीति
- वृहद औद्योगिक निवेश और रोजगार प्रसार नीति
- बायोटेक्नोलॉजी पालिसी
- उत्तराखंड स्टार्ट अप नीति
- उत्तराखंड फिल्म नीति
- उत्तराखंड पर्यटन विकास नीति
- चीड़ के पत्तियों से ऊर्जा और अन्य उत्पाद निर्माण पालिसी
समिट को लेकर मुख्यमंत्री ने देश के बड़े शहरों के साथ विदेशों का भी दौरा किया। मुख्यमंत्री ने जापान और चेक गणराज्य को साझेदार देश घोषित किया है। सिंगापुर भी समिट में प्रतिभाग करेगा। समिट के दौरान साझेदार देशों द्वारा अपनाई गई औद्योगिक नीतियों को रेखांकित कर कंट्री सेशन आयोजित किया जाएगा। कई देशों के राजदूत भी समिट के लिए पहुंचे हैं।
सिंगल विंडो प्रणाली पर फोकस
सरकार ने व्यापार करने में आसानी के लिए सिंगल विंडो सिस्टम पर फोकस बढ़ाया है। निवेशक को प्रपोजल पर आनलाइन स्वीकृति मिलेगी। विभागों की लेटलतीफी खत्म करने के लिए थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन का प्रावधान किया है। लैंड बैंक को जीआईएस (भौगोलिक सूचना सिस्टम) पर कर दिया गया है। प्रस्ताव पर 15 दिन में मंजूरी की डेड लाइन तय की गई है। स्थापना के बाद उत्पादन शुरू करने की औपचारिकताओं के लिए विभागीय स्वीकृतियां 30 दिन में पूरी होंगी।
ग्रामीण क्षेत्रों की बदलेगी तस्वीर
सरकारी दावों के अनुसार इन्वेस्टर्स समिट का लाभ दूरस्थ ग्रामीण इलाके की जनता को भी पहुंचेगा। सरकार ने उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन और भूमि व्यवस्था अधिनियम में बदलाव का निर्णय लिया है। पर्वतीय क्षेत्रों में अब उद्योगपति कितनी भी भूमि खरीद सकता है। इसमें स्वास्थ्य, चिकित्सा और शिक्षा में निवेश को भी शामिल किया गया है। सगंध पौधों की खेती, जैविक खेती, फूड प्रोसेसिंग पर फोकस रहेगा। पर्यटन में होम स्टे और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।