50 साल बाद जब आईएमए से पासआउट हुए 1970 बैच के पूर्व सैन्य अधिकारी एक सामने जुटे तो उनका खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस बैच के अधिकारियों ने 1971 के युद्ध में भाग लिया था। युद्ध के अनुभवों को एक दूसरे से साथ साझा करते हुए उनकी भुजाएं एक बार फिर फड़क उठीं।
मौका था 46वें रेगुलर और 30 तकनीकी एंट्री कोर्स की गोल्डन जुबली रियूनियन का। कोविड-19 के कारण हालांकि इस बार कुछ ही पूर्व सैन्य अधिकारी दून पहुंचे, लेकिन इस दौरान वर्चुअल मीटिंग के जरिए उन्होंने साथ बिताए पलों और अपने अनुभवों को एक दूसरे के साथ साझा किया।
यह बैच ऐसा था, जिन्होंने पास आउट होते ही तुरंत 1971 के भारत-पाक युद्ध में भाग लिया था और बांग्लादेश को एक नए देश के रूप में देखा था। भारत-पाक युद्ध में इस बैच के 12 अधिकारी शहीद हुए थे। इनमें से दो लेफ्टिनेंट कंवलजीत सिंह और लेफ्टिनेंट मंजूनाथ को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
इसके अलावा इस बैच को छह गैलेंटरी, चार वीर चक्र, एक कीर्ति चक्र और एक शौर्य चक्र प्राप्त हो चुका है। मेजर जनरल चंद्र प्रकाश के नेतृत्व में आईएमए पहुंचे छह सैन्य अधिकारियों ने इस दौरान शहीद स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी आंखे नम हो गईं। इस दौरान पूर्व सैन्य अधिकारियों की ओर से वर्चुअल मीट का आयोजित किया। इसमें बड़ी संख्या में बैच के पूर्व सैन्य अधिकारियों ने भाग लिया और अपने अनुभव, साथ बिताए पलों को याद किया। भारत-पाक युद्ध के पलों को याद करते हुए पूर्व सैनिकों एक बार फि र जोश से भर गए।