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देहरादून: दवा व्यापारी से लूट में जीवा के शॉर्प शूटर समेत तीन गिरफ्तार, करने वाले थे एक और वारदात

Thu, 22 Oct 2020 11:54 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  •  शूटर मुजाहिद उर्फ खान ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर की थी दून अस्पताल के पास लूट 
  • - मुजाहिद पर पहले से हैं हत्याओं और लूट के कई मुकदमे, संजीव माहेश्वरी जीवा के लिए करता है काम 
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दवा व्यापारीसे लूट के आरोपी गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दून अस्पताल चौक पर दवा व्यापारी से हुई लूट में पुलिस के हाथ बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश के कुख्यात संजीव माहेश्वरी जीवा के शॉर्प शूटर मुजाहिद उर्फ खान समेत तीन आरोपियों को पकड़ा है। आरोपियों के पास से लूटा गया टिफिन, घटना में प्रयोग की गई देसी पिस्टल व दो छुरे बरामद हुए हैं। मुजाहिद नाम के बदमाश के ऊपर पहले से हत्याओं और लूट के कई मुकदमे दर्ज हैं। 

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डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने बृहस्पतिवार को पुलिस लाइन में आयोजित पत्रकार वार्ता में 19 अक्तूबर की रात में हुई लूट का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि दवा व्यापारी गौरव भार्गव दुकान बंद कर घर जा रहे थे। पार्किंग में खड़ी कार के पास पहुंचने पर मोटरसाइकिल पर आए तीन बदमाशों ने उन्हें पिस्तौल दिखाकर हाथ से बैग झपट लिया। हालांकि बैग में केवल एक खाली टिफिन था।

इस वारदात के बाद अधिकारियों और थाना पुलिस के साथ बैठक कर एसपी सिटी श्वेता चौबे के निर्देशन में एक टीम गठित की गई। टीम ने बदमाशों के जाने के संभावित रास्तों के सीसीटीवी फुटेज देखे तो अगले दिन पंत रोड पर एक कैमरे में बाइक सवार एक बदमाश नजर आया। उसके हुलिए का हाल ही में जेल से छूटे और पहले से जमानत पर चल रहे बदमाशों से मिलान किया गया। इस दौरान एसपी सिटी और उनकी टीम को बदमाश के हुलिए के बारे में स्थानीय सूत्रों से इनपुट मिला। इसके आधार पर बृहस्पतिवार को तीन बदमाशों को पंत रोड से गिरफ्तार कर लिया गया।
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गिरफ्तार बदमाशों में मुजाहिद उर्फ खान निवासी एमडीडीए कॉलोनी डालनवाला, कलीम अहमद निवासी शांति विहार रायपुर और तरुण तिवारी निवासी सरस्वती विहार मूल निवासी लखीमपुर खीरी शामिल हैं। मुजाहिद संजीव जीवा की गैंग का शॉर्प शूटर है। मुजाहिद पर हरिद्वार में व्यापारी और लखनऊ में एक छात्र नेता की हत्या का मुकदमा चल रहा है। वह एक साल से जमानत पर है और इस समय पैसों की तंगी से जूझ रहा था। इसके लिए उसने कलीम के कहने पर इस लूट को अंजाम दिया। तीनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। 

एंबुलेंस चालक कलीम ने बनाई थी योजना 

मुजाहिद ने पुलिस को बताया कि वह काफी दिनों से आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। जमानत मिलने के बाद वह दून अस्पताल के पास कलीम से मिलने-जुलने लगा था। कलीम का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, लेकिन वह मुजाहिद के बारे में सब कुछ जानता था। बीते दिनों मुजाहिद ने कलीम से अपने हालात बताए। इस पर कलीम ने गौरव भार्गव नाम के दवा व्यापारी के बारे में बताया कि वह दिनभर की बिक्री का पैसा एक बैग में रखकर अपने घर ले जाता है। इस पर उन्होंने बाइक उठाई और अपने एक साथी तरुण को भी साथ लिया। बाइक पर मुजाहिद सबसे पीछे बैठा था। उसी ने पिस्तौल दिखाकर गौरव के हाथ से बैग लूटा। 

बृहस्पतिवार को भी करनी थी एक वारदात 
बदमाशों को जब यह पता चला कि बैग में सिर्फ एक टिफिन है तो उन्होंने उसे कलीम के कमरे में डाल दिया और बैग को एक नाले में फेंककर अपने अपने घर चले गए। ऐसे में मुजाहिद ने फिर दोनों से कहा कि इसमें कुछ हाथ नहीं लगा। लिहाजा, दूसरी लूट को अंजाम दिया जाए। इस पर बृहस्पतिवार सुबह से ही वे पंत रोड पर रेकी कर रहे थे, लेकिन इसी बीच पुलिस ने पहुंचकर तीनों को दबोच लिया। 

स्थानीय मुखबिर तंत्र की मिली बड़ी मदद 
बताया जा रहा है कि इस वारदात में सीसीटीवी फुटेज से तो हुलिया मिल गया था, लेकिन उस जैसे व्यक्ति को ढूंढना काफी मुश्किल हो रहा था। ऐसे में एसपी सिटी और उनकी टीम के स्थानीय तंत्र की इसमें बड़ी भूमिका सामने आई है। इसके लिए डीआईजी ने भरे मंच पर उनकी प्रशंसा भी की। टीम में एसआई नरेश राठौर, दीपक धारीवाल, चौकी प्रभारी धारा शिशुपाल राणा, चौकी प्रभारी लक्ष्मण चौक लोकेंद्र बहुगुणा, कांस्टेबल लोकेंद्र, राजमोहन, रविशंकर, नवीन, और एसओजी के कांस्टेबल अरशद, प्रमोद और अमित शामिल हैं। 
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मुजाहिद ने लखनऊ में किया था छात्र नेता का मर्डर

कुख्यात जीवा का विश्वास जीतने के लिए मुजाहिद ने लखनऊ में छात्र नेता की हत्या कर दी थी। इसके बाद से जीवा उसे हर काम के लिए पैसे देता था। जीवा ही उसकी हर बार जमानत कराता था, लेकिन अब एक साल से ज्यादा समय से खुद जीवा ही जेल में बंद है तो उसके पास कोई काम नहीं आ रहा था। 

दरअसल, मुजाहिद पहले देहरादून में रेत-बजरी सप्लाई का कारोबार करता था। उसने बताया कि वर्ष 2013 में वह जीवा से मिलने बाराबंकी गया था। वहां जीवा ने उसे अपने गैंग में शामिल कर लिया। कुछ समय बाद जीवा ने उसे लखनऊ में छात्र नेता पिंटू की हत्या करने को कहा था। ऐसे में उसने जीवा का विश्वास पाने के लिए पिंटू की गोली मारकर हत्या कर दी। लखनऊ पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया, लेकिन सात माह बाद ही उसे जमानत मिल गई। 

इसके बाद वर्ष 2017 में जीवा ने ही उसे हरिद्वार में एक व्यापारी को मारने के लिए कहा था। व्यापारी की तस्दीक विक्की नाम के व्यक्ति को करनी थी। लेकिन उसने किसी दूसरे व्यापारी की तरफ इशारा कर दिया, मुुजाहिद ने गोली मार दी। वारदात के लगभग डेढ़ साल बाद ही संजीव जीवा ने उसकी जमानत करा दी।

उसने पुलिस को बताया कि जीवा ही उसे काम देता था, जिसके उसे अच्छे खासे पैसे भी मिलते थे, लेकिन जीवा पिछले साल से लखनऊ जेल में एक नेता की हत्या में बंद है। ऐसे में अब वह खाली था और कोई कमाई नहीं हो रही थी। ऐसे में उसने इस लूट को अंजाम दिया। 
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