प्रदेश के सबसे बडे़े सरकारी अस्पताल में शामिल राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल तक में आईसीयू कक्ष में बेड की संख्या ऊंट के मुंह में जीरा वाली स्थिति में है। दून अस्पताल के आईसीयू कक्ष में महज पांच बेड हैं। लेकिन यह अक्सर फुल रहते हैं। दून अस्पताल में देहरादून जिलेके अलावा पूरे प्रदेश से और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के समीपवर्ती जिलों के गंभीर मरीज भी उपचार के लिए लाए जाते हैं। जिससे आईसीयू की जरूरत वाले गंभीर मरीज को राहत मिलने की उम्मीद कम रहती है।
आयुष्मान योजना का भी नहीं मिल रहा फायदा
दून अस्पताल के बाद मरीजों को आईसीयू न मिलने पर उन निजी अस्पतालों में रेफर किया जाता है, जो आयुष्मान योजना के तहत कवर होते हैं। तीमारदार गंभीर हालत में एंबुलेंस से मरीज को इन निजी अस्पतालों में ले जाता है, लेकिन कई मौकों पर सीमित संख्या में योजना के अंतर्गत कवर हो रहे इन अस्पतालों में भी आईसीयू नहीं मिल पाता। जिससे तीमारदार मरीज का इलाज दूसरे अस्पताल ले जाकर महंगे खर्च पर कराने को मजबूर होते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के इसका सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ता है।
सरकारी अस्पतालों में बढ़ेंगे आईसीयू बेड
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके गुप्ता ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या की तुलना में आईसीयू में बेड निश्चिततौर पर बहुत कम हैं। उन्होंने बताया कि राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नए आईसीयू में 21 बेड बढ़ेंगे। इसका निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। जिससे वहां 26 बेड हो जाएंगे। इसी तरह, गांधी शताब्दी अस्पताल और कोरोनेशन अस्पताल में भी क्रमश: चार और तीन बेड का आईसीयू बनने जा रहा है।