राशन की कालाबाजारी को रोकने और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने चावल की सब्सिडी राशन उपभोक्ताओं के खाते में भेजने की योजना शुरू की थी। इसके बावजूद सरकार बीते सात माह से सब्सिडी के दो करोड़ रुपये खुद दबाए बैठी है।
बता दें, आपूर्ति विभाग की ओर से हर महीने प्रति परिवार पांच किलो गेहूं व 10 किलो चावल आवंटित किया जाता है। इसमें पांच किलो गेहूं व ढाई किलो चावल केंद्र से मिलता है। साढ़े सात किलो चावल राज्य सरकार देती है। केंद्र की ओर से पूर्व की भांति पांच किलो गेहूं व ढाई किलो चावल उपभोक्ताओं को मिलता है।
राज्य सरकार अपने हिस्से के साढ़े सात किलो चावल के बदले सब्सिडी के 75 रुपये राशन उपभोक्ताओं के बैंक खाते में भेजती है। राज्य खाद्य योजना के तहत प्रदेश में दून में एक लाख 45 हजार परिवारों को लाभ मिलता है। हालांकि इनमें से अब तक मात्र 50 हजार परिवारों ने ही आपूर्ति कार्यालय में अपने बैंक खाते की जानकारी दी है। अब स्थिति यह है कि अप्रैल माह से बैंक खाता संख्या जमा कराने वाले राशन उपभोक्ता भी सब्सिडी की धनराशि से वंचित हैं। सूत्रों की मानें तो मामला शासन में लटका हुआ है।
शासन की ओर से चावल की सब्सिडी की धनराशि जारी नहीं की गई है। शासन से धनराशि जारी करने की मांग की गई है। धनराशि जारी होते ही खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी।
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जसवंत सिंह कंडारी, जिला आपूर्ति अधिकारी