गुलिस्तां ने स्वरोजगार का अनोखा उदाहरण पेश किया है। देहरादून की रहने वाली गुलिस्तां बेझिझक सड़कों पर ई-रिक्शा चला रही हैं।
उनका परिवार पिछले 30 सालों से किराये के मकान में रह रहा है। 25 वर्षीय गुलिस्तां ने पांचवीं तक की पढ़ाई की है। गुलिस्तां की मां ने पिता के गुजर जाने के बाद मजदूरी करके परिवार को पाला और सभी बहनों की शादी भी करवाई। इसके लिए उन्हें अपना घर भी बेचना पड़ा गुलिस्तां पांच बहनों में सबसे छोटी हैं।
गुलिस्तां का कहना है कि भूख से मरने से अच्छा है कि समाज के खोखले नियमों से लड़ा जाए। ई -रिक्शा लेने से पहले वह एक दवा कंपनी में काम करती थी, लेकिन वहां उन्हें उचित वेतन नहीं मिलता था। ऐसे में उन्होंने मकान मालिक की मदद से बैंक लोन लिया और ई-रिक्शा खरीदा।