सीओ धीरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि वारदात का मास्टमाइंड सौरभ था। वह डाकपत्थर तिराहे पर स्थित कोहली प्रोविजन स्टोर में काम करता है। सौरभ ने बताया कि वह शराब पीने का आदी है। अक्सर वह घर के नजदीक बरोटीवाला स्थित शराब के ठेके से शराब लेने जाता था। उसे पता था कि शराब के ठेके में काम करने वाले सेल्समैन दिनभर की कमाई को जमा रात को देहरादून जाते हैं। उसने निक्कू, कपिल और विपिन को भी लूट की साजिश में शामिल कर लिया। वारदात को अंजाम देने के लिए उसने गंगोह सहारनपुर से एक तमंचा खरीदा। चारों करीब डेढ़ हफ्ते तक सेल्समैनों के आने-जाने के रूट और समय की रेकी करते रहे।
एक अगस्त को ठेका बंद होने के बाद चारों आरोपी दो अलग-अलग बाइक पर सेल्समैनों के पीछे-पीछे चल दिए। पहले उन्होंने लांघा रोड पर घटना को अंजाम देना का प्रयास किया, लेकिन भीड़ ज्यादा होने के कारण नाकाम रहे। इसके बाद पर उन्होंने धूलकोट के जंगल में सेल्समैन को रोकने का प्रयास किया। वे नहीं रुके तो सौरभ ने तमंचा से फायर झोंक दिया। आरोपियों को लगा कि फायर मिस हो गया है। जिसके बार चारों सुद्धोवाला से मांडेवाला होते हुए जंगल के पीछे वाले रास्ते से भाऊवाला, छरबा रोड होते हुए पृथ्वीपुर पहुंच अपने-अपने घर चले गए।
दुकान में भी की थी चोरी
पूछताछ के दौरान सौरभ ने बताया कि 31 जुलाई को उसी ने अपने इन्हीं साथियों के साथ मिलकर कोहली प्रोविजन स्टोर में चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। वारदात को अंजाम देने के बाद उसने चोरी के सामान को बेलावाला के जंगल में छिपा कर रखा था। जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया है।
पुलिस टीम में ये रहे शामिल
पुलिस टीम में कोतवाल विकासनगर राजीव रौंथाण, कोतवाल सहसपुर राकेश गुंसाई, थानाध्यक्ष कालसी गिरीश नेगी, एसएसआई सहसपुर कुलदीप पंत, एसएसआई विकानगर रामनरेश शर्मा, चौकी प्रभारी बाजार दीपक मैठाणी, एसआई सनोज कुमार, कांस्टेबल प्रविंद, नीरज, सतीश, त्रेपन, किरणपाल, संदीप, नवीन कोहली, इरशाद, दीपक चौहान, प्रवीन, एसओजी कॉस्टेबल जितेंद्र शामिल रहे।