चूंकि, दून में नशा बाहर से आता है तो इसके लिए उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और पंजाब की सरकारों से भी मदद ली जाएगी। उन्होंने बताया कि देहरादून में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने जो सर्वे किया है उसकी भयावह तस्वीर सामने आई है। यह सर्वे फिलहाल पहले फेज का है। इसे बस्तियों और इनके आसपास किया गया है। स्कूलों, कॉलेजों और इंजीनियरिंग संस्थानों के आसपास सर्वे किया जाना है।
नशा करने में 11 फीसदी लड़कियां शामिल
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नेहा कुशवाह ने सर्वे की जानकारी देते हुए बताया कि नशा करने वालों का जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के स्वयंसेवकों ने सर्वे किया था। इसमें यह भी सामने आया कि नशा करने वालों में 11 फीसदी लड़कियां भी शामिल हैं। इनकी उम्र 15 साल से 25 साल तक है। उन्होंने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर लोग नशा मुक्ति केंद्र में इलाज महंगा होने के कारण नहीं जा पाते। इसके लिए अब योजना बनाई जा रही है। कंपनियों और धनाड्य लोगों से सम्पर्क कर धन उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे।
सर्वे की कुछ और बातें
नशा करने वालों की औसत उम्र 25 से 27 वर्ष।
सबसे कम उम्र पांच साल और सबसे अधिक 85 वर्ष।
70 फीसदी नशा करने वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग।
नशा करने वालों में 20 फीसदी निरक्षर लोग शामिल।
54 फीसदी लोग जिन्होंने उच्च शिक्षा ग्रहण की है।
26 फीसदी लोग जो कि 12वीं तक पढ़े हैं।