प्रदेश में डेंगू मरीजों की शुरुआती पहचान के लिए फीवर सर्वे कराया जाएगा। डेंगू के संदिग्ध लक्षण पाए जाने पर मरीज की सैंपल जांच की जाएगी। डेंगू की पुष्टि होने पर मरीज के घर के आसपास 50 घरों के दायरे में फोकल स्प्रे किया जाएगा। वहीं, डेंगू से निपटने को आईसोलेशन वार्ड में नोडल अधिकारी नामित किए जाएंगे।
सचिव स्वास्थ्य अमित सिंह नेगी ने डेंगू रोग की रोकथाम के लिए सभी जिलाधिकारियों, सभी विभागों और नगर आयुक्तों को दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा गया कि जिलाधिकारी डेंगू रोकथाम के लिए किए जा रहे कार्यों की नियमित रूप से समीक्षा करेंगे। कोविड केयर सेंटर और संस्थागत क्वारंटीन सेँटरों के साथ अस्पतालों के आसपास जलभराव न हो। इस समस्या के लिए पीआरडी और स्वयं सेवकों को तैनात किया जाए।
सचिव ने कहा कि जून से नवंबर तक डेंगू संक्रमण काल रहता है। इसे देखते हुए डेंगू नियंत्रण के लिए ब्लाक वार माइक्रो प्लान बनाया जाए। केंद्र की गाइड लाइन के अनुसार जिला, बेस चिकित्सालय, मेडिकल कालेजों में डेंगू मरीजों के इलाज के लिए अलग आईसोलेशन वार्ड बनाए जाएं। यहां मच्छरदानी युक्त बेड की व्यवस्था होनी चाहिए।