नियम
-स्कूल सोसाइटी का मूल नियम यह है कि कोई भी विद्यालय बिना लाभ-बिना हानि के संचालित किया जाएगा।
-विद्यालय से जो भी कमाई होगी, वह उस विद्यालय के विकास में लगानी होगी।
-विद्यालय की सोसाइटी में परिवार के लोग सदस्य तो बन सकते हैं लेकिन लाभ का पद नहीं ले सकते। न ही वह उस सोसाइटी के स्कूल में नौकरी कर सकते हैं।
-सोसाइटी का पंजीकरण रजिस्ट्रार चिट एवं फंड में एक्ट 1860 के तहत होता है।
-आयकर छूट के नियमों के हिसाब से सोसाइटी या ट्रस्ट से संचालित विद्यालयों में कोई भी सदस्य लाभ की गतिविधि संचालित नहीं कर सकता है।
-आयकर छूट सोसाइटी व ट्रस्ट के नियम के हिसाब से संबंधित संस्थान से जो भी पैसा आएगा, उसकी पूरी जानकारी आयकर विभाग को भेजी जानी चाहिए। ताकि आयकर छूट के पैमानों पर वह विद्यालय खरा उतर सके।
यह है हकीकत
-तमाम निजी स्कूलों में नियमविरुद्ध कॉपी-किताब और ड्रेस बेचने की गतिविधि संचालित हो रही है।
-विद्यालयों में परिवारों का कब्जा है। उन्होंने अपने हिसाब से परिवार के सदस्यों को ही लाभ के पदों पर बैठा रखा है।
-कई स्कूल अपने शिक्षकों के बैंक खाते में अधिक वेतन देकर उनसे कैश में वापस ले रहे हैं।
-स्कूल संचालकों ने स्कूलों को ही अपनी कमाई का जरिया बना लिया है।
-शहर के तमाम स्कूल आयकर छूट को अपनी कोई जानकारी ही नहीं भेजते हैं।
-अल्पसंख्यक दर्जे वाले स्कूलों में नियमानुसार तो संबंधित समुदाय के छात्र को बेहद सस्ती दरों पर शिक्षा ग्रहण करना चाहिए लेकिन इसके उलट स्कूलों में सबसे समान शुल्क वसूला जा रहा है।
-खातों का लेखा-जोखा रखने के मामले में भी स्कूलों की मनमानी चरम पर है।
एजुकेशन हब के नाम से विख्यात देहरादून में इस समय करीब 300 निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं। इनमें तमाम नामी गिरामी स्कूलों के अलावा गली-मोहल्लों के स्कूल भी शामिल हैं।
महंगी कारों वाले स्कूल संचालक निशाने पर
आयकर विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि तमाम स्कूलों के संचालक महंगी कारों में घूमते हैं। विदेशों में घूमना, मोटा पैसा खर्च करना उनका शगल है। ऐसे कुछ स्कूल संचालकों को भी आयकर विभाग ने चिह्नित किया है। सरकार के आदेश के बावजूद सीबीएसई से मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों में महंगी किताबें बेची गई। इन स्कूलों पर शिक्षा विभाग कार्रवाई भी कर रहा है। उधर, राजधानी में 60 से ज्यादा आईसीएसई के स्कूल हैं, जिनमें महंगी किताबें बेची जाती हैं। या फिर स्कूल किसी पुस्तक विक्रेता से सांठगांठ करके किताबें बिकवा रहे हैं। आयकर विभाग की नजर अब इस कमाई के खेल पर भी पड़ गई है। यह आने वाले समय में स्कूल संचालकों के लिए बड़ा सिरदर्द साबित होगा।
दून इंटरनेशनल संचालकों को आयकर का समन
आयकर विभाग ने बुधवार को दून इंटरनेशनल स्कूल और दून इंटरनेशनल रीवरसाइड में सर्वेक्षण करने के बाद स्कूल संचालकों को समन जारी किया है। आयकर छूट शाखा की जांच पड़ताल में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिसके बाद मान परिवार को गाजियाबाद मुख्यालय तलब किया गया है।
मान परिवार पर आयकर अधिकारियों से बदसलूकी का आरोप
दून इंटरनेशनल स्कूल के मान परिवार पर आयकर विभाग के अधिकारियों के साथ बदसलूकी करने का आरोप लगा है। आरोप है कि देर रात तक आयकर की टीमें दून इंटरनेशनल स्कूल में रहीं लेकिन न तो चेयरमैन डीएस मान आए और न ही संबंधित लोगों ने किसी भी कागज पर हस्ताक्षर किए। आखिरकार आयकर विभाग ने आयकर अधिनियम के तहत डीएस मान के कार्यालय पर ही नोटिस चस्पा कर दिया। दूसरी ओर, सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि मान परिवार के कई सदस्यों ने आयकर अधिकारियों के साथ बदतमीजी की है। हालांकि आयकर अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने अपने आयकर के सिद्धांत के तहत शांतिपूर्वक कार्रवाई की है। हालांकि डीआईएस के चेयरमैन डीएस मान ने किसी भी बदसलूकी से इंकार किया है।