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देहरादून: पदोन्नति मामले में कार्रवाई न होने से इंजीनियर खफा, सड़कों पर उतरेगा एससीएसटी फेडरेशन 

Mon, 16 Dec 2019 09:06 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • पावर जूनियर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने बैठक कर जताया आक्रोश
  • रायपुर में हुए हादसे में ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Demo Pic
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विस्तार
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जेई से एई के पद पर पदोन्नति न होने से पावर जूनियर इंजीनयर्स एसोसिएशन में आक्रोश है। एसोसिएशन ने कहा कि पदोन्नति के लिए निगम की ओर कमेटी बनाई गई थी। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद भी निगम जानबूझ कर पदोन्नति की कार्रवाई नहीं कर रहा है। इसके साथ ही एसोसिएशन ने रायपुर में हुए हादसे में जेई के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने पर भी आक्रोश जताते हुए ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

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एसोसिएशन की माजरा सब स्टेशन परिसर में रविवार को हुई बैठक में केंद्रीय अध्यक्ष जीएन कोठियाल ने कहा कि एसोसिएशन ने पदोन्नति को लेकर प्रबंधन से लंबे समय तक वार्ता की एवं तय समय सीमा तक इंतजार किया।

प्रबंधन द्वारा लगातार पदोन्नति किए जाने का सिर्फ  आश्वासन दिया जाता रहा, लेकिन कार्रवाई नहीं की। मामले को बेवजह कोर्ट केस का हवाला देकर विवादित बनाने के लिए  कमेटी बना दी गई। एसोसिएशन के संज्ञान में आया है कि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, लेकिन इसके बाद भी पदोन्नति की कार्रवाई नहीं की गई है।
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एसोसिएशन इस संबंध में मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा सचिव को भी इस मामले की संपूर्ण जानकारी दे चुका है। साथ ही दोबारा तीनों निगमों के प्रबंध निदेशकों को ज्ञापन सौंप दिया गया है। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं होती है तो एसोसिएशन आंदोलन को बाध्य होगा।

इस मौके पर एसोसिएशन ने आईटी पार्क सब स्टेशन में घटित दुर्घटना में ठेकेदार द्वारा जेई के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का भी विरोध किया। पदाधिकारियों का आरोप है कि निगम में लाइन स्टाफ  की भारी कमी केचलते लगातार हादसे हो रहे हैं। इन परिस्थितियों में जेई को दोषी ठहराना जायज नहीं है। बैठक में प्रांतीय अध्यक्ष रविंद्र सैनी, कर्ण सिंह, आनंद, राहुल अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

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पदोन्नति में आरक्षण की मांग लेकर सड़कों पर उतरेगा एससीएसटी फेडरेशन 

पदोन्नति में आरक्षण देने की मांग को लेकर उत्तराखंड एससीएसटी इंप्लाइज फेडरेशन सड़कों पर उतरकर आंदोलन शुरू करेगा। रविवार को फेडरेशन की बैठक में सर्वसम्मति से आंदोलन का एलान किया गया। तीन जनवरी को प्रदेश स्तरीय आक्रोश रैली निकालकर सचिवालय कूच किया जाएगा।

जबकि 28 दिसंबर को सभी जिलों में सांकेतिक रैली निकालकर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा। फेडरेशन की मांग है कि एससीएसटी वर्ग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी को सरकार तत्काल वापस ले। प्रमोशन में लगी रोक को यथावत रखा जाए, जब तक इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आ जाता है। 

कौलागढ़ स्थित ओएनजीसी आफिसर्स क्लब में आयोजित बैठक की अध्यक्षता फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष  करम राम ने की। जिसमें पदोन्नति में आरक्षण देने के मुद्दे पर विचार विमर्श कर आंदोलन का एलान किया गया। फेडरेशन ने आरोप लगाया कि सरकार एससीएसटी वर्ग को अधिकारों से वंचित कर रही है। इसके लिए एससीएसटी वर्ग के कर्मचारी व समुदाय के लोग एकजुट होकर जंग लड़ेंगे। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि पहले चरण में 28 दिसंबर को सभी जनपद मुख्यालय में रैली निकालकर प्रदर्शन किया जाएगा और डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजेंगे।

जबकि दूसरे चरण में तीन जनवरी को परेड ग्राउंड से आक्रोश रैली निकालकर सचिवालय का घेराव किया जाएगा। आंदोलन कार्यक्रम की तैयारी के लिए 22 दिसंबर को एससीएसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक संगठनों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी।

बैठक में प्रांतीय महासचिव हरि सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रणवीर सिंह तोमर, मुख्य विधि सलाहकार कांता प्रसाद, संरक्षक सुवर्धन, चंद्र सिग्वाल, दलीप चंद्र आर्य, मोदीमल तेगवाल, चंद्रशेखर, गंभीर सिंह तोमर, कोषाध्यक्ष मटन लाल, भीम लाल मेहरा, विनोद कुमार, चंद्र बहादुर, कुलदीप कुमार, किरन पाल, छत्रपाल सिंह, एसएस कटारिया, मुकेश हल्दिया आदि मौजूद थे। 


एससीएसटी वर्ग के कर्मचारियों की लगातार उपेक्षा हो रही है, जिससे फेडरेशन ने आंदोलन के बाध्य होना पड़ा। एससीएसटी वर्ग के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
-करम राम, अध्यक्ष, एससीएसटी इंप्लाइज फेडरेशन 

फेडरेशन की ये हैं प्रमुख मांगें

-पदोन्नति में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एसएलपी को सरकार वापस ले। 
-कौशिक समिति की रिपोर्ट के आने तक पुराने रोस्टर प्रणाली के तहत रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की जाए।
-विशेष अभियान चला कर बैकलॉग के पदों को तत्काल भरा जाए। 
-इंदु कुमार समिति और इरशाद आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक किया जाएगा। दोनों रिपोर्ट के आधार एससीएसटी का सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व तय कर एक्ट बनाया जाए। 
-सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में लगाई गई रोक यथावत रखा जाए। जब तक सुप्रीम कोर्ट कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता है। 
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