पदोन्नति में आरक्षण देने की मांग को लेकर उत्तराखंड एससीएसटी इंप्लाइज फेडरेशन सड़कों पर उतरकर आंदोलन शुरू करेगा। रविवार को फेडरेशन की बैठक में सर्वसम्मति से आंदोलन का एलान किया गया। तीन जनवरी को प्रदेश स्तरीय आक्रोश रैली निकालकर सचिवालय कूच किया जाएगा।
जबकि 28 दिसंबर को सभी जिलों में सांकेतिक रैली निकालकर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा। फेडरेशन की मांग है कि एससीएसटी वर्ग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी को सरकार तत्काल वापस ले। प्रमोशन में लगी रोक को यथावत रखा जाए, जब तक इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आ जाता है।
कौलागढ़ स्थित ओएनजीसी आफिसर्स क्लब में आयोजित बैठक की अध्यक्षता फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष करम राम ने की। जिसमें पदोन्नति में आरक्षण देने के मुद्दे पर विचार विमर्श कर आंदोलन का एलान किया गया। फेडरेशन ने आरोप लगाया कि सरकार एससीएसटी वर्ग को अधिकारों से वंचित कर रही है। इसके लिए एससीएसटी वर्ग के कर्मचारी व समुदाय के लोग एकजुट होकर जंग लड़ेंगे। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि पहले चरण में 28 दिसंबर को सभी जनपद मुख्यालय में रैली निकालकर प्रदर्शन किया जाएगा और डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजेंगे।
जबकि दूसरे चरण में तीन जनवरी को परेड ग्राउंड से आक्रोश रैली निकालकर सचिवालय का घेराव किया जाएगा। आंदोलन कार्यक्रम की तैयारी के लिए 22 दिसंबर को एससीएसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक संगठनों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी।
बैठक में प्रांतीय महासचिव हरि सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रणवीर सिंह तोमर, मुख्य विधि सलाहकार कांता प्रसाद, संरक्षक सुवर्धन, चंद्र सिग्वाल, दलीप चंद्र आर्य, मोदीमल तेगवाल, चंद्रशेखर, गंभीर सिंह तोमर, कोषाध्यक्ष मटन लाल, भीम लाल मेहरा, विनोद कुमार, चंद्र बहादुर, कुलदीप कुमार, किरन पाल, छत्रपाल सिंह, एसएस कटारिया, मुकेश हल्दिया आदि मौजूद थे।
एससीएसटी वर्ग के कर्मचारियों की लगातार उपेक्षा हो रही है, जिससे फेडरेशन ने आंदोलन के बाध्य होना पड़ा। एससीएसटी वर्ग के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
-करम राम, अध्यक्ष, एससीएसटी इंप्लाइज फेडरेशन
फेडरेशन की ये हैं प्रमुख मांगें
-पदोन्नति में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एसएलपी को सरकार वापस ले।
-कौशिक समिति की रिपोर्ट के आने तक पुराने रोस्टर प्रणाली के तहत रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की जाए।
-विशेष अभियान चला कर बैकलॉग के पदों को तत्काल भरा जाए।
-इंदु कुमार समिति और इरशाद आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक किया जाएगा। दोनों रिपोर्ट के आधार एससीएसटी का सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व तय कर एक्ट बनाया जाए।
-सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में लगाई गई रोक यथावत रखा जाए। जब तक सुप्रीम कोर्ट कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता है।