देहरादून के पुराने बासमती का बीज किसान स्वयं संरक्षित करते थे। जलवायु परिवर्तन और फसल की लंबाई अधिक होने की वजह से किसानों का धीरे धीरे नई प्रजातियों की ओर रुझान बढ़ गया और देहरादून की बासमती विलुप्त होती चली गई।
- आरके जोशी, विकासखंड प्रभारी, विकासनगर कृषि विभाग
दून बासमती टाइप-3 थी। प्रति हेक्टेयर इसकी पैदावार कम होने और तेज हवा में फसल गिरने से नुकसान होता था। अब इसकी जगह कस्तूरी व पूसा बासमती ने ले ली है। दून बासमती के बीज पर शोध करने की आवश्यकता है।
- डॉ. सीएमएस नेगी, परियोजना अधिकारी, तराई बीज विकास निगम।
शहरीकरण के चलते दून बासमती का क्षेत्रफल लगातार घटा है। किसानों ने भी टाइप थ्री बासमती के बीज का उत्पादन छोड़ दिया है। इस कारण दून बासमती टाइप थ्री का बीज नहीं मिल रहा है। किसान हाईब्रीड बासमती की खेती कर रहे हैं।
- केसी पाठक, प्रभारी निदेशक कृषि विभाग