जांच के लिए समिति गठित
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है। उन्होंने बताया कि यह मामला केवल किसी अन्य व्यक्ति के आयुष्मान कार्ड पर उपचार प्राप्त करने तक सीमित नहीं है बल्कि मरीजों की सुरक्षा, अधिकारों और चिकित्सा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर विषय है। तीन सदस्यीय समिति की अध्यक्षता मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. विवेकानंद सत्यवाली करेंगे। समिति में डॉ. वंदना बिष्ट और डॉ. पवनीश लोहान भी शामिल हैं। समिति को तीन कार्य दिवसों के भीतर जांच रिपोर्ट और सुधारात्मक सुझाव सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। प्राचार्य ने कहा कि समिति आयुष्मान लाभार्थी सत्यापन, फोटो मिलान, आधार-बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण और निगरानी तंत्र की विस्तृत समीक्षा करेगी।
मंजीत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज, जांच शुरू
अपना आयुष्मान कार्ड लगाकर किसी दूसरे व्यक्ति का उपचार कराने मामले में अस्पताल प्रबंधन की तहरीर पर पुलिस ने मंजीत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 26 मई को मंजीत सिंह निवासी गोविंदगढ़ ने कोर्डियोलॉजी विभाग में डॉ. सलील गर्ग की निगरानी में भर्ती होने के लिए अपना बायोमीट्रिक कराया। आरोप है कि इस दौरान उसने विक्की नामक मरीज को अपनी जगह भर्ती कराया और उसका उपचार करा दिया। उपचार पूरा होने के बाद 29 मई को मंजीत स्वयं आयुष्मान काउंटर पर पहुंचे लेकिन आयुष्मान मित्र की सक्रियता के चलते यह मामला पकड़ा गया। उसी समय आयुष्मान मित्र ने इसकी सूचना अस्पताल प्रबंधन को दी। इसके बाद जांच कराई गई। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।