राजधानी में नदियों के किनारे किए गए अतिक्रमण को हटाने का साहस सरकार भी नहीं जुटा पाई है। मनमोहन लखेड़ा बनाम राज्य सरकार के मामले में भी हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। तब सरकार ने मलिन बस्तियों को छोड़कर अन्य जगहों पर कार्रवाई की। मलिन बस्तियों को बचाने के लिए सरकार अध्यादेश तक ले आई थी। इसी अध्यादेश की आड़ में अन्य अतिक्रमणकारी भी बच गए। बड़ा वोट बैंक यहां निवास करता है। यही कारण है कि सरकार इस अतिक्रमण को लेकर हमेशा दबाव में रहती है।
नदी-नालों को पाटकर हो रही अवैध प्लॉटिंग
केवल सहस्त्रधारा ही नहीं बल्कि शहर के कई इलाके ऐसे हैं, जहां नदी-नालों को पाटकर बड़े पैमाने पर अवैध प्लॉटिंग हो रही है। मसूरी रोड, रायपुर रोड, धर्मपुर, बंजारावाला समेत कई इलाकों में नदी-नालों को मिट्टी से पाटकर वहां अवैध प्लॉटिंग की गई है। कई जगह नदियों के किनारे बड़े भवन खड़े हो चुके हैं। वहीं, कुछ जगहों पर प्लॉटिंग कर लोगों को जमीनें बेची जा रही हैं। प्रशासन और एमडीडीए इस मामले में आंख मूंदकर बैठे हैं।