त्योहार के रंग में कहीं मिलावट भंग न घोल दे। दीप पर्व दिवाली दस्तक दे रहा है, लिहाजा मिलावटखोरों की बांछे खिली हुई हैं। खोया, पनीर, दूध हर चीज में मिलावट की ‘बू’ आ रही है।
मिलावटखोरों के अपने कुछ खास तरीके हैं, जिनके जरिए वह त्योहार पर मुनाफा खींचने की फिराक में हैं। साफ है कि उनकी यह कवायद शहरवासियों की सेहत को मुश्किल में डाल सकती है। सूत्रों की मानें तो कुछ यूं चल रहा मिलावट का कारोबार-
सुगंध से धोखा
मिलावटखोर डालडा और सूखा पाउडर मिलाकर नकली खोया तैयार कर रहे हैं। डालडा खोया तैयार करने के लिए दूध की क्रीम निकाली जाती है। फिर रिफाइंड या डालडा मिला लिया जाता है। सूखे पाउडर का खोया तैयार करने को सूखा मिल्क पाउडर, पानी और डालडा मिलाते हैं। इसमें हाइड्रो, पापड़ी नाम के केमिकल मिलाने से खोये जैसी सुगंध आती है।
दूध में बस पानी
भैंस केएक लीटर दूध में छह प्रतिशत फैट और नौ प्रतिशत अघृत ठोस पदार्थ जेसे प्रोटीन, विटामिन, मिनरल, कार्बोहाइड्रेट होने चाहिएं। दूध में तय मात्रा से अधिक पानी मिलाने से फैट की मात्रा प्रति लीटर तीन प्रतिशत तक कम हो जाती है। फायदा पहुंचाने वाले ठोस पदार्थ भी नहीं बचते। हाल ही में आई कई रिपोर्ट दूध में फैट कम होने की पुष्टि कर चुकी हैं।
इस पनीर से बचके
गर्म पानी में स्किम्ड मिल्क की बेकार सामग्री को घोलकर उसमें खाने वाला सोडा डाला जाता है। इस सामग्री को गर्म करके इसमें पाम आयल या वेजिटेबल आयल मिला दिया जाता है। गंध के लिए हाइड्रो, पापड़ी केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। मुनाफा कमाने के लिए इस तरह का पनीर त्योहार के मौसम में सबसे ज्यादा बिकता है।