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पौधे लगाकर धरा सजाएं, अन्न हिमालय का अपनाएं

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हरेला पर्व पर सेलाकुई में फलदार वृक्षारोपण करते रोटरी क्लब के सदस्य।---संवाद फोटो - फोटो : DEHRADUN
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धाद और अमर उजाला की ओर से हरेला-घी संग्रांद के तहत एक महीने तक चलने वाले कार्यक्रमों के तहत रविवार को ग्राम अस्थल, मालदेवता स्थित स्मृति वन में नियमित पौधरोपण की श्रृंखला को आगे बढ़ाया गया। पौधरोपण करने के साथ ही धरती को हराभरा व सुंदर बनाने और पहाड़ी अन्न की उपयोगिता बढ़ाने संबंधी ‘पौधे लगाकर धरा सजाएं, अन्न हिमालय का अपनाएं’ नारा लगाया गया।
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रविवार को नीलमोहर के पौधरोपण के बाद स्मृति वन को संवारने और पूर्व में रोपे गए पौधों के रखरखाव के लिए सामूहिक श्रमदान किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सुधा बहुखंडी ने महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला रचित सरस्वती वंदना ‘वर दे वीणा वादिनी वर दे’ से किया। इसके बाद प्रिया देवली ने पलायन पर गढ़वाली कविता प्रस्तुत की। पूर्व सैनिक महावीर रावत ने प्राणी के लिए ऑक्सीजन का महत्व और उसके लिए पेड़-पौधों की उपयोगिता बताई। कांता घिल्डियाल ने स्मृति वन में रोपे गए गुलमोहर के पौधे के संदर्भ में एक भावपूर्ण कविता के साथ पहाड़ पर भी छोटी-छोटी कविताएं सुनाईं। हरीश नैनवाल ने भी शानदार गीत गाया।
इसके बाद साहित्यकार कुसुम भट्ट ने अपनी पहली पुस्तक से पहाड़ की लड़की के मन की एक कहानी सुनाई। एमआर सकलानी ने सावन के रिमझिम महीने पर गढ़वाली गीत सुनाया। आशा डोभाल ने ‘न संघर्ष न तकलीफें, क्या मजा फिर जीने में’, सुशील पुरोहित ने ‘ब्याली सैंया रे कै बाठा रै तू’, नीना रावत ने गजल सुनाई। राजीव पांथरी ने संस्कृत का एक सुंदर श्लोक सुनाया। विमला रावत ने स्वरचित गढ़वाली गीत प्रस्तुत किया। हिमांशु आहूजा ने विभिन्न वृक्षों से जुड़ा यात्रा वृतांत साझा किया। सुरेश स्नेही ने स्वरचित गढ़वाली गीत ‘अपणु घौर-बार, अपणु गौं-गुठयाल, न जा, न जा, न जा, छोड़ि की’ प्रस्तुत किया। पत्रकार संजीव कंडवाल ने पहाड़ और हरियाली की बात की। कुसुम मलासी और सिद्धि डोभाल ने भी कविता सुनाई।
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धाद के अध्यक्ष लोकेश नवानी ने कहा कि पर्यावरण चेतना चिपको आंदोलन से फैली और अब धाद इसमें नए प्रयोग कर रहा है। ये हमारी धरती को सुंदर बनाने की मुहिम है। इस अवसर पर धाद के सचिव तन्मय ममगाईं, अर्चना ग्वाड़ी, विनोद, सुशील पुरोहित, प्रदीप कुकरेती, नीना रावत, आशा डोभाल, सुधा बहुखंडी, प्रिया देवली, कांता घिल्डियाल, हरीश नैनवाल, एमआर सकलानी, अजीत सिंह आदि उपस्थित थे।
कल्यो फूड फेस्टिवल : धाद की ओर से यूं तो हर महीने के अंतिम रविवार को स्मृति वन में हिमालयी अन्न और भोजन की परंपरा के पक्ष में कल्यो फूड फेस्टिवल आयोजित किया जाता है। इस रविवार को भी स्मृति वन में आए सभी अतिथियों के लिए पहाड़ी अनाजों से बने हुए कल्यो का भी आयोजन था। इसका सभी ने आनंद लिया।
फंची का स्टॉल : कल्यो के दौरान स्मृति वन में पहाड़ी अनाज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए फंची का स्टॉल भी लगा था। सभी ने अपनी अपनी रुचि और सुविधा अनुसार पहाड़ी अन्न खरीदा।
ओपन माइक : अतिथियों के लिए ओपन माइक का भी विशेष आयोजन था, जिसमें वह पांच मिनट में कोई गीत, कविता या किस्सा सब के साथ साझा कर सकते थे। इसका संचालन मीनाक्षी जुयाल ने किया।
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स्मृति वन में अपने प्रियजनों की स्मृति में रोपे पौधे
प्रदीप कुकरेती-कपूर का पौधा
दिशा गांधी- नीलमोहर
नंदिता सिंह-कचनार
सुशीला गुसाईं-नीम
कुसुम भट्ट- हारसिंगार
हिमांशु अरोड़ा-अमलताश
हरीश चंद्र नैलवाल, शीशा शिवाय और वंदिता-नीलमोहर
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