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जिंदगियां लील रहा नाला: एक साल में तीन लोगों की हो चुकी मौत, कई मकान ध्वस्त, दफ्तरों में घूम रही सुधार की फाइल

Fri, 28 Jul 2023 03:35 PM IST
रेनू सकलानी माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून

सार

चंद घंटों की बारिश में ही नाले के आसपास रहने वाले लोगों की रातों की नींद गायब हो जाती है। 13 जुलाई 2022 को नाले किनारे रहने वाले एक परिवार की दो सगी बहनें घर के सामने ही खेल रही थीं। इस दौरान अचानक नाले में पानी का बहाव तेज हुआ और दोनों बहने बह गईं। एक का शव कुछ दूर से ही बरामद कर लिया गया था।
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नाला (प्रतीकात्मक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शांति विहार से गुजरने वाला नाला हर साल जिंदगियां लील रहा है। लेकिन, इसके सुधार की सुध लेने वाला कोई नहीं है। सालों पहले जनप्रतिनिधियों ने नाले के सुधार के लिए प्रस्ताव भेजे। मगर, लालफीताशाही के चंगुल में फंसी इसकी फाइल अब भी दफ्तर दर दफ्तर घूम रही है।

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कोई एस्टिमेट बनाने की बात कर रहा है तो कोई शासन की स्वीकृति के इंतजार करने की। हालात ये हैं कि अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नतीजा यह है कि चंद घंटों की बारिश में ही नाले के आसपास रहने वाले लोगों की रातों की नींद गायब हो जाती है।

घटना एक
13 जुलाई 2022
यह नाला आमवाला तरला से भी गुजरता है। 13 जुलाई 2022 को नाले किनारे रहने वाले एक परिवार की दो सगी बहनें घर के सामने ही खेल रही थीं। इस दौरान अचानक नाले में पानी का बहाव तेज हुआ और दोनों बहने बह गईं। एक का शव कुछ दूर से ही बरामद कर लिया गया था। लेकिन, दूसरी को ढूंढने के लिए एसडीआरएफ को 36 घंटे लग गए। दूसरी बच्ची का शव करीब 22 किलोमीटर दूर दूधली से बरामद हुआ था।

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18 जुलाई 2023
सपेरा बस्ती और शांति विहार के बीच में इस नाले में अचानक 18 जुलाई को बाढ़ जैसे हालात हो गए। नतीजा यह हुआ कि एक ही झटके में चार दुकान और चार मकान जमींदोज हो गए। पुलिस ने रातोंरात बस्ती खाली कराई और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। अब भी यहां के कुछ परिवार दूसरी जगहों पर रह रहे हैं।

जुलाई 2019
बरसात में उफनाए नाले ने ऊपर से गुजरने वाले पुल को भी नहीं बख्शा। इस पुल के नीचे की मिट्टी एक ही रात में खिसक गई। इससे यहां पर कई दिनों तक यातायात बाधित रहा। सिंचाई विभाग यहां पर फौरी राहत के लिए उपचार किया और जैसे-तैसे लोगों का आवागमन शुरू हो पाया।

हर बरसात में होती हैं दुर्घटनाएं
हर साल बरसात में इस नाले के कारण कई दुर्घटनाएं होती हैं। दुर्घटनाओं के बाद मुआवजे बंटते हैं और फिर सुधार की बातें होती हैं। जनप्रतिनिधि इसके लिए प्रस्ताव भेजते हैं, मगर इन पर कोई निर्णय अभी तक नहीं लिया गया। पिछले साल दो बच्चियों की मौत के बाद इसके लिए स्थानीय पार्षद ने सुधार को प्रस्ताव भेजा था। यह प्रस्ताव पहले नगर निगम गया। इसके बाद सिंचाई विभाग और फिर यहां से लघु सिंचाई विभाग चला गया। पार्षद के अनुसार सुनने में आया था कि इसका दो करोड़ रुपये का एस्टीमेट बन गया है, लेकिन अब तक कोई काम शुरू नहीं हुआ है।
 
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अतिक्रमण की भेंट चढ़ गया नाला
यह नाला रायपुर के ऊपरी इलाके से निकलता है। इसके बाद आमवाला तरला, शांति विहार, भगत सिंह काॅलोनी होते हुए रिस्पना नदी में मिल जाता है। नाले में ऊपर के स्थान पर तो चौड़ाई अच्छी खासी है। लेकिन, आमवाला तरला और सपेरा बस्ती में आते-आते नाले की चौड़ाई कम हो गई है। वर्तमान में सपेरा बस्ती के पास नाले की चौड़ाई महज चार से पांच फीट ही रह गई है। इससे यहां मकानों और लोगों को खतरा ज्यादा बढ़ गया है। इन्हीं जगहों पर कई खतरे के प्वाइंट बन गए हैं।

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क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि
नाले की समस्या को कई बार उठाया गया है। इसमें सुधार के लिए सिंचाई विभाग जिम्मेदार है। लगातार इसकी सफाई की बात होती है मगर हालात नहीं सुधर रहे हैं। मुख्यमंत्री की घोषणाओं में भी नाले का सुधार शामिल है। लेकिन, अभी तक अधिकारियों ने स्थाई हल नहीं निकला है। -उमेश शर्मा काउ, विधायक रायपुर

मैंने पिछले साल नाले का प्रस्ताव भेजा था। पहले यह प्रस्ताव नगर निगम भेजा गया। इसके बाद यह सिंचाई विभाग गया। वहां से लघु सिंचाई विभाग में। पता चला कि नाले का एस्टीमेट भी तैयार हो गया। दो करोड़ रुपये में नाले के दोनों तरफ सीसी के पुश्ते बनने थे, लेकिन अभी तक कोई काम शुरू नहीं हुआ। -हुकम सिंह, पार्षद शांति विहार
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