एक परिचित ने अपने मोबाइल पर मृत्यु प्रमाणपत्र दिखाया तो किसान भागमल को जालसाजी का पता चला। उसके बाद प्रमाणपत्र जारी करने वाले संबंधित विभाग से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने इससे अनभिज्ञता जताई।
इस पर पीड़ित ने 17 अक्तूबर को त्यूनी के थाना प्रभारी को शिकायती पत्र दिया। लेकिन, त्यूनी पुलिस ने दो माह में इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। इससे नाराज किसान ने एसएसपी से मिलकर दुखड़ा सुनाया।
जीवित रहते किसी का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने का मामला बेहद गंभीर है। साइबर सेल को जल्द प्रमाणपत्र वायरल करने वाले का पता लगाने को कहा गया है। आरोपी के पकड़ में आने के बाद यह साफ हो पाएगा कि मृत्यु प्रमाणपत्र कहां से क्यों जारी किया गया। इस पूरे खेल में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-अरुण मोहन जोशी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक