न्यायिक मजिस्ट्रेट (विकासनगर) जतिन मित्तल की अदालत ने वर्ष 2015 के एक सड़क हादसे में यात्री की मौत के मामले में विक्रम चालक को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त करार दिया। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि हादसा चालक की लापरवाही या वाहन की तेज गति के कारण हुआ था। घटना 10 दिसंबर 2015 की है। अभियोजन के अनुसार, लक्ष्मीपुर पेट्रोल पंप के पास एक विक्रम अनियंत्रित होकर पलट गया था। हादसे में विक्रम में सवार यात्री निराकार को गंभीर चोटें आई थीं और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के सिर, कंधे व चेहरे पर गहरी चोटों के साथ सीने की हड्डी टूटने और लीवर फटने की पुष्टि हुई थी। पुलिस ने मामले में विक्रम चालक करण सिंह (निवासी ग्राम जामनपुर, थाना सहसपुर) के खिलाफ तेज गति से वाहन चलाने और गैर इरादतन हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर चार्जशीट अदालत में पेश की थी। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से अदालत में चार गवाह पेश किए गए। लेकिन ऐसा कोई भी ठोस तथ्य या चश्मदीद गवाह अदालत के सामने नहीं रखा जा सका, जिससे यह साबित हो सके कि हादसे के वक्त चालक की कोई लापरवाही थी। दोनों पक्षों को सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण निर्णय का हवाला दिया।अदालत ने कहा कि कानून की नजर में केवल यह साबित होना पर्याप्त नहीं है कि आरोपी वाहन चला रहा था बल्कि अभियोजन को चालक की लापरवाही और उससे हुई मौत के बीच का सीधा संबंध भी संदेह से परे साबित करना होता है। अदालत ने आरोपी करण सिंह को सभी आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया।