पूछताछ में लोगों ने झोपड़ी में उमाशंकर (60) नामक साधु के रहने की बात बताई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर उमाशंकर के नाम से पोस्टमार्टम करवा दिया। शुक्रवार देर शाम ग्रामीणों ने उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया।
अखबारों में शनिवार सुबह अपनी मौत की खबर पढ़कर कोतवाली पहुंचे साधु उमाशंकर कोतवाल के मुखातिब होकर बोले, साहब! मैं साधु उमाशंकर हूं। मैं मरा नहीं जिंदा हूं। उमाशंकर ने पत्रकारों को बताया कि वह दो-तीन माह से यहां रह ही नहीं रह रहे थे।
अपना आधार कार्ड बनवाने के लिए यूपी के बलिया गए हुए थे और इसके बाद कुंभ जाने के लिए रुपये का इंतजाम करने के लिए गदरपुर (ऊधमसिंह नगर) में भिक्षा मांग रहे थे। जिस इनसान को मरा समझकर पोस्टमार्टम तक करा दिया उसे जिंदा देख पुलिस वाले दंग रह गए।
पुलिस के सामने अब बड़ा सवाल है कि झोपड़ी में जिस व्यक्ति का जला हुआ शव मिला वह कौन था। कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी को मारकर झोपड़ी में फेंककर आग लगा दी गई हो। कलकत्ता फार्म चौकी प्रभारी लक्ष्मण सिंह जगवाण ने बताया कि पुलिस ने जो भी कार्रवाई की, वह ग्रामीणों से पूछताछ के बाद उनकी तहरीर पर ही की। इसीलिए पोस्टमार्टम के बाद शव भी ग्रामीणों के सुपुर्द कर दिया गया था और ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार भी कर दिया है।
हर बिंदु को को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। विसरा सुरक्षित रखा गया है। आसपास के थानों में पता किया जा रहा है कि हाल के दिनों में कोई गुमशुदगी तो नहीं हुई, यदि हुई होगी तो डीएनए मैच कराया जाएगा। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह साफ है कि झोपड़ी में जो व्यक्ति मरा मिला, उसकी मौत जलने से ही हुई है।
- उमेश मलिक, कोतवाल