दून महिला अस्पताल के शौचालय में बृहस्पतिवार को नवजात शिशु का शव मिलने से सनसनी फैल गई। नवजात का शव इस हालत में था कि वहां मौजूद डॉक्टरों, पुलिस और अन्य लोगों की भी रूह कांप गई।
नवजात के सिर पर चोट के निशान होने के कारण लोक-लाज के डर से उसकी हत्या की आशंका जताई जा रही है। सीसीटीवी फुटेज से पूरे राज से पर्दा उठने की उम्मीद है। चिकित्सकों ने बताया कि शिशु के 24 घंटे की अवधि में पैदा होने का अनुमान है।
उधर, अस्पताल प्रशासन बाहर से नवजात शिशु को लाकर अस्पताल के बाथरूम में फेंकने की बात कर रहा है। फिलहाल पुलिस ने अज्ञात अभिभावकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की शुरू कर दी है।
दून महिला अस्पताल में बृहस्पतिवार सुबह करीब साढ़े दस बजे एक नवजात शिशु का शव पड़ा मिला। प्रत्यक्षदर्शी महिला ने शोर मचाया तो कुछ देर में वहां कई लोग जुट गए। सूचना पर शहर कोतवाली पुलिस भी आ गई।
गहनता से जांच की गई तो शिशु के सिर पर चोट के निशान और शरीर पर खून के धब्बे पाए। इससे अनुमान लगाया गया कि नवजात को सिर के बल फेंका गया है। पुलिस ने शव का पंचायतनामा भरने के बाद मरीजों, तीमारदारों और अस्पताल प्रशासन से बातचीत की। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, जिन महिलाओं की डिलीवरी हुई है वे शिशु मां के पास हैं।
पुलिस एक भी अभिभावक चिह्नित नहीं कर पाई
नवजात शिशु के शव का शाम को पोस्टमार्टम हो गया। शुक्रवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत का सही कारण सामने आ पाएगा। फिलहाल अज्ञात अभिभावकों के खिलाफ धारा 317 के तहत मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच-पड़ताल की जा रही है। अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज से भी काफी कुछ साफ होने की उम्मीद है। अस्पताल प्रशासन से फुटेज उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
-विकास रावत, धारा चौकी प्रभारी
पुलिस एक भी अभिभावक चिह्नित नहीं कर पाई
वर्ष 2016 में अमर उजाला ने नवजात शिशु के शव मिलने के मामले में पुलिस की ओर से केस दर्ज नहीं करने को लेकर बाकायदा अभियान चलाकर कई खबरें प्रकाशित की थी। इस अभियान का असर हुआ और मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने की पहल शुरू की।
तत्कालीन एसएसपी सदानंद दाते के निर्देश पर डालनवाला, प्रेमनगर और शहर कोतवाली में नवजात शिशुओं के लावारिस शव बरामद होने के मामले में अज्ञात अभिभावकों के खिलाफ पांच मुकदमे दर्ज किए गए। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि किसी भी मामले में पुलिस अभिभावक तक नहीं पहुंच पाई। पुलिस ने तमाम मामलों में फाइनल रिपोर्ट लगाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
नवजात का शव मिलने के मामले में जांच के आदेश
दून महिला अस्पताल में प्रसव केंद्र के शौचालय में नवजात शिशु का शव बरामद होने के मामले में जांच कमेटी गठित कर दी गई है। दून मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता ने कहा कि डॉ. मीनाक्षी जोशी और डॉ. चित्रा को प्रकरण की जांच सौंपी गई है।
जांच के बाद ही सही स्थिति का पता लग सकेगा। उधर, शिशु का शव मिलने के बाद अस्पताल की ओर से भर्ती महिलाओं की जांच कराई गई। चिकित्सकों का दावा है कि जिन महिलाओं का अस्पताल में प्रसव हुआ उनके बच्चे उनके पास हैं। दून महिला अस्पताल से पहले बच्चा चोरी होने की घटना भी हो चुकी है। लिहाजा शौचालय में नवजात का शव मिलने के बाद अस्पताल की सुरक्षा के दावों को लेकर अस्पताल प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में है।
दून महिला अस्पताल में सफाई करने पहुंचे कर्मचारी को शौचालय में नवजात दिखाई दिया। कर्मचारी ने इसकी सूचना प्रसव केंद्र में तैनात चिकित्सकों को दी। मौके पर पहुंची अस्पताल की चिकित्सकों ने शिशु की जांच की तो वह मृतक मिला। उनका अनुमान है कि नवजात जिंदा रहा होगा, लेकिन रात भर भूखे रहने से उसकी मौत हो गई होगी।
दून मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता ने कहा कि प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि शिशु अस्पताल में नहीं जन्मा है। बुधवार से बृहस्पतिवार तक अस्पताल में 28 महिलाओं का प्रसव हुआ और सभी भर्ती हैं। इनमें जिन बच्चों की मौत हुई उन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया गया था। डॉ. चित्रा के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद ही असल स्थिति पता चलेगी। शिशु को सुबह पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।