जी हां, जो अलकनंदा नदी उत्तराखंड में गढ़वाल मंडल के लोगों की प्यास बुझा रही है, उसमें 'जहर' तैर रहा है।
श्रीनगर (गढ़वाल) जल विद्युत परियोजना के बैराज गेट पर मनुष्यों और जानवरों के सड़े-गले शव अटक रहे हैं। इससे यहां सड़न फैल रही है। जाहिर सी बात है कि इसका असर पानी पर पड़ रहा है।
दिक्कत यह है कि श्रीकोट, श्रीनगर और पौड़ी क्षेत्र की जनता बैराज के बाद का ही पानी पीती है। ऐसे में बीमारियों की फैलने की आशंका है। विधायक श्रीनगर गणेश गोदियाल और कीर्तिनगर पुलिस ने भी बैराज की सफाई के लिए परियोजना कंपनी को पत्र भेजे हैं।
इधर, कंपनी प्रबंधन का कहना है कि एक सप्ताह के अंतर्गत इस समस्या का निराकरण करा लिया जाएगा। इसी वर्ष फरवरी-मार्च माह से जल विद्युत परियोजना के लिए झील में पानी का रुकना शुरू हुआ है।
कोटेश्वर से नौर तक अलकनंदा नहर से गुजर रही है। जबकि अलकनंदा के मूल प्रवाह क्षेत्र में बैराज के बाद से पावर हाउस तक बहुत कम पानी बह रहा है। इसी क्षेत्र में श्रीकोट, पौड़ी और श्रीनगर की पंपिंग पेयजल योजनाएं हैं।