शासन की मंशा पर भी उठ रहे सवाल
सूत्रों की मानें, तो जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कूट रचना कर अंकों में छेड़छाड़ कर चहेतों को फायदा पहुंचाने, शैक्षणिक गतिविधियों के नंबरों में खेल, फर्जी खेल प्रमाणपत्रों के जरिए कुछ आवेदकों को लाभ पहुंचाने जैसी बातों का उल्लेख किया गया है।
बताया जा रहा कि यदि इस जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई हुई तो जिला सहकारी बैंकों के अध्यक्ष, प्रबंधक और जिला सहायक निबंधक तक कार्रवाई की चपेट में आ सकते हैं, लेकिन जांच रिपोर्ट को शासन में एक टेबल से दूसरी टेबल में घुमाया जा रहा है, उससे शासन की मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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‘मेरे पास जब फाइल आएगी, तभी कर पाऊंगा कोई कार्रवाई’
विभागीय मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का कहना है कि जहां तक उनकी जानकारी है, फाइल न्याय विभाग को भेजी गई है। जब तक फाइल लौटकर उनके पास नहीं आ जाती, वह इस बारे में कुछ नहीं कह सकते। उधर, सचिव डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने कहा कि जांच रिपोर्ट न्याय विभाग के पास विधिक परामर्श के लिए भेजी गई है। रिपोर्ट वापस कब तक आएगी, इस बारे में वह कुछ नहीं कह सकते हैं।