छात्र संख्या के लिहाज से राज्य के सबसे बड़े डीएवी कॉलेज को नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रिडिएशन काउंसिल(नैक) के एक्रिडिएशन का 11 साल से इंतजार है।
कॉलेज को वर्ष 2005 में नैक का बी प्लस ग्रेड मिला था। तब से लेकर आज तक सूबे की राजनीति की धुरी रहे डीएवी कॉलेज की गुणवत्ता पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। नतीजतन, यूजीसी की पाबंदी से कॉलेज की प्रतिष्ठा पर आंच आई है। डीएवी कॉलेज अपने भीतर गौरवशाली इतिहास समेटे हुए हैं। न केवल देश बल्कि कई मित्र देशों के नामी अधिकारी और नेता कॉलेज के एल्युमिनाई रहे हैं। कॉलेज की प्रतिष्ठा पर अब यूजीसी का ग्रांट पर पाबंदी लगाने का पत्र धब्बा लगा रहा है।
कॉलेज को वर्ष 2005 में नैक का बी प्लस ग्रेड मिला था। इसके बाद वर्ष 2010 में इसके रिनिवल की प्रक्रिया शुरू होनी थी, लेकिन आगे नहीं बढ़ पाई। तमाम राजनीतिक उठापटक के बीच कॉलेज में करीब डेढ़ साल पहले नैक एक्रिडिएशन की प्रक्रिया शुरू तो कराई गई लेकिन आगे नहीं बढ़ पाई। नतीजतन, डीबीएस पीजी कॉलेज, एसजीआरआर पीजी कॉलेज, एमकेपी पीजी कॉलेज को तो नैक का ग्रेड मिल गया, लेकिन डीएवी आज भी वैसा का वैसा ही है।
यूजीसी के हिसाब से नैक की अनिवार्यता है। प्रदेश का सबसे बड़ा महाविद्यालय है तो एक्रिडिएशन सबसे अहम है। अगर एक्रिडिएशन होगा तो निश्चित तौर पर सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त हो जाएंगी। लेकिन प्रबंध तंत्र जिस प्रकार से लापरवाह है। महाविद्यालय में स्थाई प्राचार्य न होना भी एक वजह रहा है। मैं माननीय सीएम से भी आग्रह करूंगा कि वह प्रबंध तंत्र अगर कॉलेज को नहीं चला पा रहा है तो सरकार कॉलेज का अधिग्रहण कर ले।
- सूर्यकांत धस्माना, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष डीएवी पीजी कॉलेज