राजपुर रोड
राजधानी देहरादून में जहां तक व्यवस्था सुधारने की बात है तो पुलिस की सख्ती ठीक दिखती है लेकिन यह कैसी सख्ती है कि हुडदंग के नाम पर बेगुनाह छात्रों को पुलिस की बर्बरता का शिकार होना पड़ा।
इस दफा डीएवी छात्रसंघ चुनाव में पुलिस की भूमिका न केवल छात्र राजनीति को कुचलती दिखी बल्कि लोकतांत्रिक प्रणाली पर हावी भी होती दिखी।
ना हों उन्माद के लक्षण
जीत की खुशी मनाने का हक सबको है। एक ओर राजनेता जीतने के बाद कई दिनों तक अपने क्षेत्र में रैली निकालते रहते हैं, तब पुलिस उनकी सुरक्षा में मुस्तैद होती है, लेकिन छात्रसंघ में पुलिस का लाठियां भांजना राजनीतिक चाल की ओर ही ज्यादा इशारा कर रहा है।
छात्रों के साथ ही आम लोगों को भी इस घटना पर अपना कड़ा विरोध प्रकट करना चाहिए, जिससे पुलिस प्रशासन ऐसा करने से पहले जनता की ताकत का अंदाजा लगा सके, बशर्ते के इस विरोध में उन्माद के लक्षण ना हों।