चकराता कैंट के सप्लाई क्षेत्र में रेस्टोरेंट व किराने की दुकान चलाने वाले दिलबहादुर थापा काफी समय से बीमार चल रहे थे। उनका उपचार महंत इंदिरेश अस्पताल में चल रहा था। एक माह तक चले उपचार के बाद शनिवार देर शाम उनका निधन हो गया।
दिलबहादुर थापा के कोई पुत्र नहीं था। उनके घर चार बेटियों ज्वाला, प्रतिभा, प्रतीक्षा व प्राची ने जन्म लिया। उन्होंने चारों बेटियों को बेटों की तरह पाला। पिता के निधन होने पर बेटियों ने उनका अंतिम संस्कार करने की बात कही।
इतना ही नहीं पिता की अर्थी को कंधा देकर शमशान घाट तक भी बेटियां ही ले गईं। कैंट स्थित मुक्ति धाम में जब दूसरे नंबर की बेटी प्रतिभा ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी तो उस वक्त अंतिम यात्रा में शामिल लोगों की आंखों में आंसू थे।