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समाज की रूढ़ियों को तोड़ बेटियों ने दिया पिता की अर्थी को कंधा, मुखाग्नि देकर पूरा किया बेटे का फर्ज

Mon, 17 Dec 2018 10:50 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चकराता
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Funeral
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वक्त के साथ समाज की सोच भी बदल रही है। परंपराओं से हटकर बंदिशों को तोड़ते हुए चकराता में एक बेटी ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि देकर उनका अंतिम संस्कार किया।

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मृतक का कोई बेटा नहीं था बल्कि चार बेटियां थी। चार बहनों में दूसरे नंबर की बहन ने पिता को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया, जबकि चारों बेटियों ने पिता की अर्थी को कंधा देकर शमशान घाट तक पहुंचाया।

शमशान पर उस समय लोगों के आंसू छलक पड़े, जब एक बेटी ने रूढ़िवादी परंपराओं के बंधन को तोड़ते हुए अपने पिता का अंतिम संस्कार किया। उसने बेटा बनकर हर फर्ज को पूरा किया।

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चकराता कैंट के सप्लाई क्षेत्र में रेस्टोरेंट व किराने की दुकान चलाने वाले दिलबहादुर थापा काफी समय से बीमार चल रहे थे। उनका उपचार महंत इंदिरेश अस्पताल में चल रहा था। एक माह तक चले उपचार के बाद शनिवार देर शाम उनका निधन हो गया।

दिलबहादुर थापा के कोई पुत्र नहीं था। उनके घर चार बेटियों ज्वाला, प्रतिभा, प्रतीक्षा व प्राची ने जन्म लिया। उन्होंने चारों बेटियों को बेटों की तरह पाला। पिता के निधन होने पर बेटियों ने उनका अंतिम संस्कार करने की बात कही।

इतना ही नहीं पिता की अर्थी को कंधा देकर शमशान घाट तक भी बेटियां ही ले गईं। कैंट स्थित मुक्ति धाम में जब दूसरे नंबर की बेटी प्रतिभा ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी तो उस वक्त अंतिम यात्रा में शामिल लोगों की आंखों में आंसू थे।
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