उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निनिर्माण कर्मचारी कल्याण बोर्ड की अपर कार्याधिकारी बनाई गईं दमयंती रावत को शिक्षा विभाग ने एनओसी देने से भले ही इनकार कर दिया हो, लेकिन इससे उनकी कुर्सी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
श्रम मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने स्पष्ट किया है कि दमयंती के पास एनओसी लेने के लिए तीन माह का वक्त है। वह खुद इस मामले को देखेंगे। इसके अलावा वह शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय से भी पूछेंगे कि अधिकारियों की फौज होने के बावजूद दमयंती को एनओसी देने में शिक्षा विभाग को क्या आपत्ति है।
शिक्षा विभाग में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सहसपुर के पद पर कार्यरत दमयंती रावत की प्रतिनियुक्ति को लेकर मंगलवार को श्रम मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत और शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय आमने-सामने आ गए। शिक्षा मंत्री ने डॉ. हरक सिंह रावत की करीबी दमयंती रावत के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद शिक्षा विभाग ने उन्हें एनओसी देने से इनकार कर दिया।
यह मामला बुधवार को पूरे दिन सियासी चर्चा में रहा। लोग दमयंती की कुर्सी को लेकर कयास लगाते रहे। हालांकि अमर उजाला से बातचीत में डॉ. हरक सिंह रावत ने साफ किया कि फिलहाल दमयंती की कुर्सी को कोई खतरा नहीं है। नियमानुसार उनके पास एनओसी लेने के लिए तीन माह का वक्त है। इस दौरान वह खुद भी शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर एनओसी देने का अनुरोध करेंगे।
उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के पास अधिकारियों की कोई कमी नहीं है। उन्हें वेतन भी नहीं देना है। ऐसे में एनओसी न देने का औचित्य समझ में नहीं आता है। उन्होंने कहा कि बोर्ड में अपर कार्याधिकारी पद के लिए क्लास वन अफसर चाहिए। श्रम विभाग में पहले ही अफसरों की कमी है। हम न तो नई नियुक्ति कर सकते हैं और न वहां से प्रतिनियुक्ति पर ले सकते हैं। यही कारण है कि शिक्षा विभाग से दमयंती रावत को प्रतिनियुक्ति पर लिया गया है।
थमेगा या बढ़ेगा विवाद
दमयंती रावत की एनओसी को लेकर हरक सिंह रावत और अरविंद पांडेय के बीच चल रहा विवाद थमेगा या बढ़ेगा, दोनों मंत्रियों की मुलाकात के बाद ही इस पर स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। पिछली सरकार के समय 2012 में भी ऐसा ही विवाद सामने आया था। तब कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत और तत्कालीन शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी के बीच विवाद खासा बढ़ गया था। बाद में मामला भले ही सुलझ गया, लेकिन दोनों मंत्रियों के बीच तल्खी बढ़ती चली गई।