आरक्षित विधानसभा में कांग्रेस का टिकट पाने के लिए कई दलित नेता आमने सामने हैं। तीन दिसंबर को होने वाले दलित महासम्मेलन सम्मेलन से कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेशाध्यक्ष सुशील पेंगोवाल अपना दावा ठोकेंगे, जबकि उनकी टक्कर वर्ष 2012 के कांग्रेस प्रत्याशी राजपाल से होगी। माना जा रहा है कि सम्मेलन से टिकट के समीकरण तय हो सकते हैं। इसके अलावा भी यहां टिकट की लाइन में कई पुराने एवं नए कांग्रेसी जुगत लगा रहे हैं।
वर्ष 2012 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट पर कांग्रेस से राजपाल सिंह ने टिकट लेकर चुनाव लड़ा था, लेकिन राजपाल दूसरे नंबर पर रहे थे। यहां बसपा से हरिदास चुनाव जीत गए थे। उस समय यहां से कांग्रेस के ज्यादा दावेदार नहीं थे और राजपाल से अधिक मजबूत भी किसी को नहीं देखा जा रहा था, लेकिन राजपाल के दूसरे नंबर पर आने के बाद से कांग्रेस के कई नेता सक्रिए हो गए थे।
अब विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेशाध्यक्ष भी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए मैदान में कूद चुके हैं। उन्होंने तीन दिसंबर को कस्बे में दलित महासम्मेलन बुलाया है, जिसके माध्यम से वह विधानसभा चुनाव में टिकट पाने के लिए अपना रोडमैप तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।
महासम्मेलन में प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत पार्टी के बड़े नेताओं में शामिल अनुसूचित विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष केराजू एवं अनुसूचित जाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष पीएल पुनिया को भी बुलाया। इसके अलावा पार्टी में हाल ही में शामिल हुए विरेंद्र सिंह समेत जिला पंचायत सदस्य सपना वाल्मीकि, रेशमा, अतर सिंह, एसपी बावरा समेत कई नेता भी हाथ पर सवार होकर चुनावी समर में कूदने के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं, लेकिन अब देखना यह होगा कि सुशील के लिए दलित महासम्मेलन काम आता है या फिर अन्य के अपने-अपने राजनीतिक हथकंडे।