पर्यटन विभाग और साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीएफआई) की ओर से ‘द अल्टीमेट उत्तराखंड हिमालयन एमटीबी चैलेंज’ द्वितीय संस्करण का आयोजन किया जा रहा है। यह साइकिल रेस आठ से 16 अप्रैल तक होगी। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट इंवेस्टमेंट प्रोग्राम फॉर टूरिज्म (आईडीआईपीटी) की ओर से भी सहायता की जा रही है।
बुधवार को गढ़ी कैंट स्थित पर्यटन निदेशालय में इसकी जानकारी दी गई। आईडीआईपीटी के अपर कार्यक्रम निदेशक आरके जोशी ने बताया कि नौ अप्रैल को रेस का शुभारंभ सुबह सात बजे नैनीताल से होगा।
रेस पहले दिन भवाली, खुटानी, पदमपुरी, धारी, धानाचुली, बहटेलिया, क्वारब से 85 किमी की दूरी तय कर अल्मोड़ा पहुंचेगी। दूसरे दिन यानी दस अप्रैल को अल्मोड़ा से वाया कोसी, सोमेश्वर, कौसानी, गरुड़, बैजनाथ होते हुए 125 किमी की दूरी तय कर ग्वालदम में पूर्ण होगी।
इन स्थानों से गुजरेगी साइकिल रेस:
11 अप्रैल को रेस ग्वालदम से वाया नंदकेसरी, थराली, नारायणबगड़, सिमली, कर्णप्रयाग, खल, देवर, पोखरी, मोहनखाल, कनकचौरी, दुर्गाधार होते हुए 152 किमी का सफर तय कर तीसरे दिन रात्रि विश्राम के लिए रुद्रप्रयाग पहुंचेगी। चौथे दिन 108 किमी की दूरी तय की जाएगी। पांचवें दिन रेस का विश्राम नई टिहरी में होगा।
छठे दिन 72 किमी चलते हुए रेस चिन्यालीसौड़ पहुंचेगी। मसूरी में रेस का समापन होगा। 16 अप्रैल को दून में पुरस्कार वितरण कार्यक्रम होगा। प्रतिभागी छह चरणों में कुल 628 किमी की दूरी तय करेंगे।
रेस में प्रथम, द्वितीय, तृतीय आने वालों को कुल दस लाख रुपये दिए जाएंगे। ट्रेनिंग स्पेशलिस्ट आशीष शर्मा ने बताया कि रेस में हिस्सा लेने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए हैं। इसमें कुल 85 राष्ट्रीय एवं 15 अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागी हिस्सा लेंगे। पंजीकरण निशुल्क है।
इस वेबसाइट पर कराएं रजिस्ट्रेशन
www.cyclingfederationofindia.org
साइकिल रेस से होम स्टे को बढ़ावा
साइकिल रेस से होम स्टे योजना को बढ़ावा देने की तैयारी है। आयोजकों का कहना है कि साइकिल रेस के दौरान गांवों में चल रही होम स्टे योजना को लाभ दिया जाएगा।
प्रतिभागियों को होम स्टे वाले घरों में ही ठहराया जाएगा। इससे हमारी संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और प्रतिभागी लोकल फूड का स्वाद भी चख सकेंगे। राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग की अपनी सीमाएं होती हैं।
ऐसे में देशभर और विदेशों से आने वाले पर्यटकों को गांव-गांव नहीं ले जाया जा सकता है। लेकिन साइकिल रेस वाले प्रतिभागी गांव-गांव होते हुए ही जाएंगे।
ऐसे में होम स्टे योजना को बढ़ावा देने या अन्य ग्रामीणों को कुछ रोजगार देने का यह बेहतर अवसर हो सकता है। आयोजकों का कहना है कि भविष्य में इस बात पर विचार कर गांवों का तेजी से विकास किया जा सकता है।