इस तरह होती है ठगी
पेमेंट के लिए यूपीआई आईडी मांगी जाती है। शुरूआत में डेढ़ सौ रुपये से दो सौ रुपये का रुपये दिए जाते हैं। दूसरे चरण में पीड़ित को एक मैनेजर से मिलने के लिए टेलीग्राम पर आने के लिए कहा जाता है और दूसरों को समूह में शामिल करके अधिक पैसा बनाने का लालच दिया जाता है। जहां हर दो से तीन लोगों के शामिल होने के लिए निश्चित कमीशन दिया जाता है।
जब पीड़ित आश्वस्त हो जाता है तो विश्वास जीतने के लिए संदिग्ध पांच से दस हजार का भुगतान करता है। तीसरे चरण में पीड़ित के साथ यूपीआई आईडी या क्रिप्टो वॉलेट शेयर किए जाते हैं और उनसे लाखों का निवेश करने को कहा जाता है। पीड़ित को लालच दिया जाता है कि उसे राशि की निकासी के लिए न्यूनतम क्रेडिट प्वाइंट की आवश्यकता है। जिसके बाद पीड़ित लालच में आकर लाखों का भुगतान कर ठगी का शिकार हो जाता है।