सब रजिस्ट्रार (प्रथम) कार्यालय में 47 साल के इंडेक्स रजिस्टर तो चोरी हुए ही हैं। इसी अवधि में हुई रजिस्ट्रयों में जमकर धोखाधड़ी भी हुई है। मजिस्ट्रीयल जांच में आया है कि कार्यालय में जमीन के दस्तावेजों में से व्हाइटनर लगाकर मालिकों के नाम और उनके खसरा नंबर बदल दिए गए। ऐसे में जब धोखाधड़ी की जांच होती थी तो यहां प्रमाण भी नहीं मिलते थे। जिलाधिकारी के मुताबिक अब पूर्व के कई कार्मिकों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।
दरअसल, जमीन से जुड़े किसी भी धोखाधड़ी के मामले में रजिस्ट्री के दस्तावेजों की पड़ताल होती है। इंडेक्स रजिस्टर से उसके असल मालिक का नाम और फाइल नंबर पता लगाकर असल कागजात जांचे जाते हैं, लेकिन यहां तो अलग ही खेल हो रहा था। जांच में आया है कि दर्जनों धोखाधड़ी के मामलों में असली मालिक के नाम और उनसे जुड़े दस्तावेजों का ही पता नहीं चल पाया। ऐसे में न तो जालसाजों का पता चला और न ही मुकदमे किसी नतीजे पर पहुंच पाए।
जिलाधिकारी सी रविशंकर ने बताया कि इंडेक्स रजिस्टरों में व्हाइटनर का प्रयोग कर यह खेल किया गया है। जांच पूरी करने के बाद उसका अवलोकन भी कर लिया गया है। कई मामलों में शीघ्र ही मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। जो प्रकरण अदालत में विचाराधीन हैं उनमें भी सब रजिस्ट्रार कार्यालय से संबंधित पड़ताल की जा रही है। जल्द ही इनमें भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने इसमें कई बड़े मामलों को भी उजागर करने का दावा किया है।
ऐसे उजागर हुआ मामला
पिछले दिनों क्लेमेंटटाउन कैंट क्षेत्र के एक व्यक्ति की शिकायत पर यह मामला उजागर हुआ था। वह व्यक्ति जब अपने पिता के नाम दर्ज जमीन पर निर्माण कराने पहुंचा तो किसी अन्य ने उस जमीन पर अपना दावा पेश किया। पता चला कि उसके पिता ने यह जमीन 1988 में बेच दी थी। यकीन नहीं हुआ तो उसने सब रजिस्ट्रार कार्यालय से सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी। जानकारी ऐसी मिली कि उसके साथ-साथ अधिकारियों के भी होश उड़ गए। पता चला कि कार्यालय से तो 2009 में 47 साल के रिकॉर्ड (इंडेक्स रजिस्टर) चोरी हो गए हैं।