जहरीले सांप के डंसने से गंभीर रूप से बीमार हुई 12 वर्षीय बालिका को नया जीवन मिला है। सर्पदंश के बाद पूरे शरीर में जहर फैलने से बच्ची की स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई थी। उसे डिसेमिनेटेड इंट्रावस्कुलर कोएग्यूलेशन (डीआईसी) जैसी गंभीर अवस्था हो गई थी, जिसमें शरीर की रक्त के थक्के बनने की प्रणाली प्रभावित हो जाती है और अनियंत्रित रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन डॉक्टरों की सतर्कता, लगातार निगरानी और समय पर दिए गए उपचार से बालिका को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया गया।
रुद्रप्रयाग जिले की बच्छणस्यूं पट्टी के एक दूरस्थ गांव 12 वर्षीय बच्ची अपने घर के पास घास काट रही थी। इसी दौरान दीवार पर छिपे एक जहरीले सांप ने उसके हाथ पर डंस लिया। सांप के काटते ही बालिका चीख पड़ी। परिजन तत्काल उसे लेकर बेस अस्पताल, श्रीनगर पहुंचे, जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए तत्काल बाल रोग विभाग में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया।
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सी.एम. शर्मा के नेतृत्व में उपचार की पूरी जिम्मेदारी संभाली गई। उनके मार्गदर्शन में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंकिता गिरी तथा विभाग के चिकित्सकों ने लगातार बालिका की निगरानी करते हुए इलाज किया। जांच में सामने आया कि सांप का जहर तेजी से पूरे शरीर में फैल चुका था और रक्त जमने की प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित हो गई थी। हालत इतनी गंभीर थी कि बालिका के नाक सहित शरीर के अन्य हिस्सों से भी रक्तस्राव होने लगा था।