देहरादून राजकीय नारी निकेतन में एक संवासिनी के गर्भवती होने, फिर गर्भपात कराने के सनसनीखेज आरोप के मामले में पहले मंगलवार और फिर बुधवार को नारी निकेतन पहुंची राज्य महिला सशक्तीकरण परिषद और बाल आयोग की उपाध्यक्ष विजयलक्ष्मी गुसाईं आज खौफ में नजर आईं।
माने या न माने, इस घटना के बारे में वे फोन पर बात करने तक से कतरा रही हैं। वे नहीं चाहती कि अमर उजाला रिपोर्टर इस मामले में फोन पर उनसे कोई बात भी करे। अमर उजाला इस निहायत व्यक्तिगत बात को लिखना नहीं चाह रहा था, मगर यह एक ऐसा तथ्य है जो संकेत करता है कि मामला गंभीर है। न्यायहित में हमने पत्रकारिता के तय मानदंडों की लक्ष्मण रेखा लांघी है, इसके लिए हम हृदय से क्षमाप्रार्थी हैं।
इधर, कलक्टर ने जिस प्रोबेशन ऑफिसर मीना बिष्ट को मामले की जांच सौंपी थी। उन्होंने बुधवार को सारी घटना को सिरे से नकार दिया। वे कहती हैं कि मैंने संवासिनियों के बयान लिए हैं। ऐसी किसी घटना की पुष्टि नहीं हुई। इसके ठीक उलट अमर उजाला की सीमित पड़ताल में यह संकेत मिले हैं कि पत्र में लगाए गए एक मानसिक रूप से बीमार एवं गूंगी संवासिनी के गर्भवती होने और गर्भपात के आरोपों में दम है।
अमर उजाला इस घटना के सौ प्रतिशत सही होने का दावा नहीं करता, लेकिन यह दावा जरूर करता है कि अगर निष्पक्ष जांच हो तो जो सच्चाई सामने आएगी वह पत्र में लिखे तथ्यों से ज्यादा खौफनाक होगी। खैर, अमर उजाला रिपोर्टर ने प्रोबेशन ऑफिसर मीना बिष्ट के निष्कर्षों का जिक्र कलक्टर से किया तो उन्होंने मामले में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व झरना कमठान के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर जांच के आदेश दिए हैं।
राज्य महिला सशक्तीकरण परिषद और बाल आयोग की उपाध्यक्ष विजयलक्ष्मी गुसाईं और उत्तरांचल महिला एसोसिएशन (उमा) संस्था की अध्यक्ष साधना शर्मा बुधवार को दोबारा नारी निकेतन गईं। संवासिनियों को विश्वास में लेकर उनसे बातचीत की। डरी-सहमी संवासिनियां पहले तो सब कुछ सही होने की बात करती रहीं, काफी देर बाद उन्होंने माना कि वाकई में नारी निकेतन में गलत काम होते हैं।
जब विजयलक्ष्मी गुसाईं और साधना शर्मा ने कुछ गूंगी संवासिनियों से अकेले में बात की तो उन्होंने इशारों में अपने साथ होने वाले गलत कामों के बारे में बताया। यह बात स्वयं विजयलक्ष्मी गुसाईं ने अमर उजाला रिपोर्टर से साझा की। हालांकि, बाद में उन्होंने मना किया कि इसे अखबार में मत लिखना।
उन्होंने कहा कि नारी निकेतन में जो अव्यवस्था है, उस पर लिख दो। उन्होंने यहां तक ताकीद किया कि अब इस बारे में फोन पर बात मत करना। कोई बात करनी हो तो पर्सनली मिलकर करना। आज, नारी निकेतन से लौटते ही कई लोगों का दबाव आ गया।
अमर उजाला टीम ने इस मामले में जो पड़ताल की है, उसके मुताबिक कुछ दिन पहले एक मानसिक रूप से बीमार गूंगी संवासिनी का गर्भपात कराने के लिए उसे दूध में दवा मिलाकर दी गई। इसके बाद उसके पेट में कपड़ा बांध दिया गया। संवासिनी का गर्भपात करा उसके भ्रूण को आसपास के किसी गटर में फेंक दिया गया। यह सब नारी निकेतन के स्टाफ की मिलीभगत से हुआ।
दर्द बढ़ने पर अंधेरा होने का इंतजार किया गया और रात को संवासिनी को अस्पताल ले जाया गया। इसकी भनक बाकी संवासिनियों को नहीं लगने दी गई। हरिद्वार रोड स्थित एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने भर्ती करने से इंकार कर दिया तो उसे जोगीवाला स्थित एक निजी अस्पताल में दिखाया गया।
हम यहां फिर कहना चाहेंगे, इन तथ्यों में सौ प्रतिशत सच्चाई का हम दावा नहीं करते। हो सकता है यह तथ्य गलत हों, मगर आरोप लगे हैं तो सच्चाई की तह तक पहुंचने के लिए जांच तो की ही जा सकती है। पड़ताल में इसके संकेत भी मिले हैं कि नारी निकेतन में कुछ नहीं, बहुत कुछ गड़बड़ है। यहां संवासिनियों का शोषण हो रहा है।
यह नई स्थिति सामने आने पर अमर उजाला रिपोर्टर ने जिलाधिकारी रविनाथ रमन से दोबारा बात की और बताया कि बिना गंभीरता से जांच किए प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट घटना को गलत बताने लगी हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई।
राजकीय चिकित्सालय के सीएमएस को निर्देशित किया गया है कि जांच के लिए एक महिला चिकित्सक को नामित करें। इसके अलावा जिला समाज कल्याण अधिकारी कमेटी में शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि कमेटी बृहस्पतिवार से जांच का काम शुरू कर देगी। यह कमेटी पूरे मामले की जांच कर जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंपेंगी।
अमर उजाला रिपोर्टर से कलक्टर के बातचीत के कुछ ही घंटे बाद प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट का एक ऑफिसियल पत्र अमर उजाला कार्यालय पहुंचा, जिसमें उन्होंने शिकायत को भ्रामक और निराधार बताया। कुशल यह रही कि उन्होंने अमर उजाला से शिकायती पत्र मांगा है और यह भी कहा कि मामले में एफआईआर दर्ज करवाकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन क्यों नहीं कर सकता सीधी सी जांच
- यह शिकायती पत्र फैक्स नंबर 01352621190 से भेजा गया है
- यहां से शिकायत भेजने वाले की पूरी जानकारी मिल सकती है
- आरोप है कि कुछ दिन पहले एक संवासिनी का गर्भपात कराया गया
- चिकित्सकों की एक टीम बड़ी आसानी से हाल ही में गर्भवती और गर्भपात से दो-चार हुई गूंगी युवती की पहचान कर सकती है
- घटना की पुष्टि हो तो इलाज के लिए जिस अस्पताल में ले जाया गया, वहां से साक्ष्य मिल सकते हैं
- युवती की पहचान होते ही दूध का दूध पानी का पानी होने की पूरी संभावना है
- अन्य संवासिनी भी शोषण की ओर संकेत करती हैं, लगे हाथ उसकी भी जांच हो जाए