चचेरे भाई और बेटी की हत्या के बहुचर्चित मामले में गवाहों के कोर्ट में पलटने पर सुबूतों के अभाव में अदालत ने आरोपियों को बरी कर दिया। मामला वर्ष 2008 में कोतवाली थाना क्षेत्र के चुक्खूवाला का है, जहां एक युवक-युवती की हत्या कर दी गई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार चुक्खूवाला निवासी मुन्ना सोनकर ने छह मई 2008 को कोतवाली में दर्ज एफआईआर में बताया कि उसका 18 साल का बेटा मनीष पांच मई को नाराज होकर घर से चला गया था। छह मई को उसकी लाश अशोक सोनकर के घर मिली।
मामले में अशोक सोनकर, संजय, मनीष और नितिन को हत्या और षडयंत्र समेत विभिन्न धाराओं में आरोपी बनाया गया था। मगर अदालत में आरोप साबित न हो पाने पर कोर्ट ने कहा कि मात्र आरोपी अशोक सोनकर के घर से शव मिलने से आरोपी पर दोष साबित नहीं होता।
यह था मामला
चुक्खूवाला में पुल के पास मुन्ना और श्यामलाल का मकान था। श्यामलाल के बेटे अशोक और मुन्ना के बीच कुछ महीनों से अनबन थी। इसकी वजह मुन्ना के बेटे मनीष का चचेरे भाई अशोक की पुत्री से प्रेम संबंध होना बताया गया था।
मई वर्ष 2008 में दोनों युवक और युवती के घर से गायब होने पर अशोक के खिलाफ आरोप लगा कि उसने भाई और बेटे की मदद से मनीष और अपनी बेटी की हत्या कर दी। मनीष की सिर पटककर और युवती की गला दबाकर हत्या हुई थी।
खुद थाने पहुंचा था आरोपी
घटना के बाद आरोपी अशोक खुद पुलिस थाने पहुंचा और घटना की जानकारी दी। मगर अदालत में गवाहों के पलटने से मामले में आरोप साबित नहीं हो पाया।