रुड़की में आईआईटी प्रोफेसर की हत्या के बाद गायब हुआ उनका मोबाइल अब तक नहीं मिल पाया है। कहीं हत्यारा तो प्रोफेसर का मोबाइल साथ नहीं ले गया।
वहीं, पुलिस ने गुपचुप तरीके से प्रोफेसर के आवास पर जाकर जांच की। मीडिया को भी इसकी भनक नहीं लगने दी गई। जांच में क्या मिला, क्या नहीं इसकी जानकारी भी नहीं दी जा रही।
पढें...रहस्य बनी एक ही परिवार में चौथी आत्महत्या!
घर में मिला था शव
आईआईटी प्रोफेसर अरुण कुमार का रक्तरंजित शव उनके सरस्वती कुंज स्थित आवास में मंगलवार रात को मिला था। उनके हाथ की नस और गला रेता गया था। उनकी पीठ का एक हिस्सा भी जला हुआ था।
प्रोफेसर की पुत्री की तहरीर पर पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया था। बृहस्पतिवार को जांच अधिकारी एसआई रामकुमार जुयाल ने सरस्वती कुंज जाकर प्रोफेसर के आवास की जांच की।
पढें...कैसे हुई आईआईटी के प्रोफेसर की मौत?
पुलिस कर रही जांच
पुलिस ने पूरी तरह से जांच को गोपनीय रखा है। मीडियाकर्मियों को भी इसकी भनक कई घंटे बाद लगी। आवास की जांच के दौरान पुलिस को क्या सबूत मिले। इसके बारे में भी पुलिस कुछ नहीं बोल रही है। ऐसे में सवाल उठता है आखिर ऐसा क्या है जो पुलिस छिपाना चाहती है?
मोबाइल की तलाश में लगी एसओजी
प्रोफेसर के गायब मोबाइल के बाबत एसओजी ने भी अपनी जांच शुरू कर दी है। एसओजी की टीम ने आईआईटी परिसर में जाकर जांच की। साथ ही प्रोफेसर के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल और लोकेशन पता लगाने के लिए सर्विलांस की मदद ली जा रही है।
गला रेतकर की गई थी हत्या
प्रोफेसर अरुण कुमार की हत्या गला रेतकर की गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। उनके गले पर सर्जिकल ब्लेड से एक सेंटीमीटर का गहरा जख्म होने की बात रिपोर्ट में आई है।
उनके दायें हाथ की नस भी कटी हुई थी। लेकिन अभी तक यह बात साफ नहीं हुई है कि गला रेतने के बाद हाथ की नस क्यों काटी गई। एसपी देहात अजय सिंह ने बताया कि उनके गले पर एक सेंटीमीटर का जख्म था। गला रेतने से ही उनकी मौत हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस की जांच भी तेजी से शुरू हो गई है।
क्या कहते हैं अधिकारी
मामले की जांच बृहस्पतिवार को ही मुझे मिली है। इसलिए सुबह-सुबह ही जांच के लिए प्रोफेसर के आवास पर गया था। अभी जांच चल रही है, इसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
- रामकुमार जुयाल, जांच अधिकारी