अब साइबर क्राइम करने वाले अपराधियों की खैर नहीं। पुलिस ने बढ़ते साइबर क्राइम पर शिकंजा कसने का फुलप्रूफ प्लान तैयार किया है। इसके तहत पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को साइबर ट्रेनिंग सेंटर में 27 दिनों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मंशा, सूबे के करीब 150 थानों में मिनी साइबर थाने तैयार करने की है। साइबर अपराधों का खुलासा कर अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा। प्रदेश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों पर नकेल कसने के लिए पुलिस ने कमर कस ली है।
देहरादून में शनिवार को उत्तराखंड के पहले साइबर ट्रेनिंग सेंटर का उद्घाटन हुआ। मिनिस्ट्री ऑफ टेली कम्युनिकेशन के अधीन सी-डेक (सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग) नोएडा, पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों को एक्सपर्ट बनाएंगी।
चार चरण, 27 दिन में प्रशिक्षण
अवेयरनेस - यह एक दिनी होगा। इसमें अपराध के प्रकार, तरीके आदि की जानकारी दी जाएगी।
बिगनर - यह प्रशिक्षण पांच दिन का होगा। जिसमें पीपीटी के जरिये पुलिस अधिकारी-कर्मियों को साइबर क्राइम के बारे में बताया जाएगा। इसके बाद 20 नंबर का एग्जाम होगा। जिसमें 60 प्रतिशत नंबर लाने वालों को तीसरे चरण में प्रवेश दिया जाएगा।
एडवांस्ड - छह दिन तक होने वाली इस प्रशिक्षण में सिर्फ टूल्स पर फोकस किया जाएगा। साइबर अपराधों से संबंधित मामलों की विवेचना, साक्ष्य संकलन, तकनीकी विश्लेषण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें चार-चार लोगों का बैच बनाया जाएगा। हर बैच से एक-एक जवान का चयन अगले चरण के लिए किया जाएगा।
मास्टर - यह प्रशिक्षण 15 दिन का होगा। इसमें भी टूल्स पर ही फोकस किया जाएगा। इस चरण में साइबर फोरेंसिक टूल्स समेत अन्य जरूरी टूल्स का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
वर्तमान में तैनात हैं चार ट्रेनर
अभी सी-डेक की ओर से पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। उनके साथ छह महीने का अनुबंध है। चार ट्रेनर तैनात किए गए हैं। आगे इनकी संख्या में इजाफा किया जाएगा।
साइबर क्राइम तेजी से बढ़ रहा है। इस पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस का हाइटेक होना जरूरी है। बिना प्रशिक्षण के यह संभव नहीं है। उम्मीद है कि इससे पुलिस बढ़ते साइबर क्राइम पर रोक लगा पाने में कामयाब रहेगी।
- पी. रेणुका, एसएसपी, एसटीएफ