सितारगंज स्थित संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) में हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहे दो सगे भाई फरार हो गए।
जेल अफसर और सुरक्षा कर्मी उनकी तलाश में जुट गए हैं। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने प्रधान बंदी रक्षक को निलंबित कर दिया है। साथ ही कोतवाली में फरार कैदियों और प्रधान बंदी रक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
दोनों कैदी पिछले चार सालों से खुली जेल में सजा काट रहे थे। एसडीएम चंद्र सिंह इमलाल व सीओ पीएस पांगती ने जेल पहुंचकर घटना की जानकारी ली।
शनिवार सुबह करीब आठ बजे संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) के 26 कैदी प्रधान बंदी रक्षक पीतांबर दत्त भट्ट, कृषि मेट एवं उपनल कर्मी कुंदन सिंह की अभिरक्षा में लालरखास के शहतूत प्लाट में धान की रोपाई करने गए थे।
इस दौरान करीब नौ बजे नानकमत्ता के टुकड़ी गांव निवासी कैदी हंसराज उर्फ हंसा (38) और हरवंश उर्फ वंशा (34) पुत्र प्रीतम सिंह प्रधान बंदी रक्षक को चकमा देकर सिडकुल नाला फांदकर फरार हो गए। प्रधान बंदी रक्षक ने कर्मियों के साथ आधे घंटे तक उनकी तलाश की, जब वे कहीं नहीं मिले तो करीब 9:30 बजे उन्होंने उच्चाधिकारियों को उनके फरार होने की सूचना दी। इससे जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्य ने खुली जेल में सघन कांबिंग की और करीब 9:45 बजे सिडकुल पुलिस को कैदियों के फरार होने की घटना से अवगत कराया। इस पर चौकी इंचार्ज योगेश दत्त ने नाकाबंदी कर चेकिंग की। बंदियों के आचरण में सुधार होने पर उन्हें 31 जुलाई 2011 को देहरादून की जिला कारागार से यहां शिफ्ट किया गया था।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक आर्य ने बताया कि फरार कैदियों और प्रधान बंदी रक्षक पीतांबर दत्त भट्ट के खिलाफ कोतवाली में आईपीसी की धारा 223 व 224 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है। प्रधान बंदी रक्षक पीतांबर दत्त भट्ट को निलंबित कर दिया गया है।